त्रिनिदाद और टोबैगो में पीएम मोदी का संबोधन: बिहार की विरासत सिर्फ भारत नहीं, पूरी दुनिया का गौरव – पीएम
त्रिनिदाद और टोबैगो में भारतीय समुदाय से बोले पीएम मोदी: बिहार की विरासत विश्व का गौरव, रामायण बनी थी प्रवासियों की ताकत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने त्रिनिदाद और टोबैगो की अपनी पहली यात्रा के दौरान एक भव्य कार्यक्रम में भारतीय समुदाय को संबोधित किया। उन्होंने प्रवासी भारतीयों की सांस्कृतिक विरासत, संघर्ष, और भारत के वैश्विक योगदान को लेकर भावनात्मक और प्रेरणादायी बातें कहीं।
भारतीय समुदाय को बताया परिवार का हिस्सा
प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं जैसे ही इस धरती पर पहुंचा, मेरा पहला संवाद भारतीय मूल के लोगों से हुआ। यह स्वाभाविक है, क्योंकि हम एक ही परिवार से हैं।” उन्होंने कहा कि त्रिनिदाद और टोबैगो में भारतीय समुदाय की यात्रा साहस से भरी रही है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी जड़ों से जुड़ाव नहीं छोड़ा।
रामायण और भारतीय संस्कृति की शक्ति
प्रधानमंत्री ने प्रवासी पूर्वजों के संघर्षों को याद करते हुए कहा, “वे गंगा-यमुना को पीछे छोड़ गए, लेकिन रामायण को साथ लेकर आए। उन्होंने अपनी मिट्टी छोड़ी, लेकिन नमक नहीं छोड़ा।” उन्होंने प्रवासी भारतीयों को भारत की शाश्वत सभ्यता का संदेशवाहक बताया।
धार्मिक पर्व और भारतीयता की झलक
पीएम मोदी ने बताया कि त्रिनिदाद में नवरात्र, महाशिवरात्रि और जन्माष्टमी को जिस उल्लास से मनाया जाता है, वह भारतीय संस्कृति की जीवंतता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि “यहां की गलियों में बनारस और पटना की गूंज सुनाई देती है।”
राम मंदिर और सरयू जल की भेंट
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने अयोध्या के राम मंदिर की प्रतिकृति और सरयू नदी का पवित्र जल साथ लाने की बात कही। उन्होंने इसे आस्था का प्रतीक बताया और इसे त्रिनिदाद की गंगा धारा में अर्पित करने का आग्रह किया।
बिहार की गौरवशाली भूमिका
प्रधानमंत्री ने कहा कि त्रिनिदाद की उपप्रधानमंत्री कमला जी के पूर्वज बिहार के बक्सर से हैं। उन्होंने कहा, “बिहार सिर्फ भारत का नहीं, पूरी दुनिया का भी गौरव है। लोकतंत्र, राजनीति, शिक्षा और कूटनीति के क्षेत्र में इसकी ऐतिहासिक भूमिका रही है।”
भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों का ज़िक्र
प्रधानमंत्री ने कहा कि अब वह दिन दूर नहीं जब कोई भारतीय चंद्रमा पर पहुंचेगा और भारत का अपना स्पेस स्टेशन होगा। उन्होंने कहा, “अब चंदा मामा दूर के नहीं रहे, हम आदित्य मिशन जैसे अभियानों के ज़रिये सितारों तक पहुंच रहे हैं।”
महाकुंभ और सांस्कृतिक जुड़ाव
पीएम मोदी ने महाकुंभ का जल अपने साथ लाने की बात कही और इसे भी गंगा धारा में अर्पित करने का आग्रह किया। उन्होंने इसे भारतीय मूल्यों और संस्कृति को जीवंत बनाए रखने वाली धारा बताया।
प्रधानमंत्री मोदी का यह संबोधन भारतीय संस्कृति, विरासत और आधुनिक उपलब्धियों का संगम रहा। त्रिनिदाद और टोबैगो में बसे भारतीयों से उनका यह संवाद भावनात्मक जुड़ाव के साथ-साथ भारत की वैश्विक भूमिका को भी उजागर करता है।
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