पाकिस्तान में नहीं रुक रहा अल्पसंख्यकों पर अत्याचार, हिंदू-ईसाई लड़कियों का अपहरण और धर्मांतरण बदस्तूर जारी
पाकिस्तान में हिंदू, ईसाई लड़कियों का अपहरण, धर्मांतरण और जबरन विवाह बदस्तूर जारी है। पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) की नवीनतम रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।
ईशनिंदा के झूठे आरोप लगाए जाते हैं
रिपोर्ट में ईशनिंदा के आरोप में हत्याओं और कारावास के मामलों में निरंतर वृद्धि को उजागर करते हुए अल्पसंख्यकों को सुरक्षा और स्वतंत्रता सुनिश्चित करने में विफल रहने के लिए पाकिस्तान सरकार की आलोचना की गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अक्टूबर 2024 तक 750 से अधिक व्यक्तियों को ईशनिंदा के आरोप में जेल में डाल दिया गया था, जबकि आस्था-आधारित मुद्दों के आधार पर चार हत्याएं दर्ज की गई थीं।
जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही
रिपोर्ट में हिंदू समुदाय की महिलाओं और लड़कियों के अपहरण, जबरन धर्मांतरण और विवाह के मुद्दे का विशेष उल्लेख करते हुए कहा गया है कि संबंधित अधिकारियों और प्रांतीय सरकार द्वारा जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
रिपोर्ट में जरनवाला और सरगोधा में ईसाई समुदाय के खिलाफ हमलों और घटना से पहले और उसके दौरान इंटरनेट मीडिया के माध्यम से गलत सूचना फैलाने की बात कही गई, जिससे भीड़ ने चर्च और ईसाइयों के घरों पर हमला किया था।
ईशनिंदा मामलों में जबरन फंसाया जाता है
पंजाब में एक विशेष शाखा द्वारा जांच के बावजूद व्यक्तियों को झूठे ईशनिंदा मामलों में फंसाने के संदेह वाले नेटवर्क के खिलाफ कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। रिपोर्ट में धार्मिक अल्पसंख्यकों को प्रभावित करने वाले भेदभावपूर्ण कानूनों में बदलाव की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया गया। एचआरसीपी के कार्यकारी समूह के सदस्यों ने एक संवैधानिक संशोधन लाने की सिफारिश की, जो धार्मिक अल्पसंख्यकों को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का पद संभालने का अधिकार दे।