दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में शनिवार को बारिश हुई। बारिश होने से लोगों को गर्मी से राहत मिली है। हालांकि, दिल्ली में तेज बारिश लोगों के लिए आफत बन जाती है। बता दें कि पिछले कई दिनों से दिल्ली-एनसीआर में मौसम सुहावना बना हुआ है। वहीं, आज यानी (शनिवार) सुबह झमाझम बारिश हुई।
दिल्ली में छाए रहेंगे बादल
मौसम विभाग का कहना है कि शनिवार को आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। हल्की वर्षा होने की संभावना है। 10 से 20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलेगी। बीच-बीच में हवा की रफ्तार 30 किमी प्रति घंटे तक भी जा सकती है।
आज हो सकती है हल्की बारिश
यूपी और बिहार में गर्मी बहुत परेशान कर रही है। पिछले 24 घंटे के अंतराल में तापमान में भी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। वातावरण में नमी का अधिकतम प्रतिशत 55 दर्ज किया गया जबकि इसे सामान्यत: 40 प्रतिशत रहना चाहिए।
मौसम विज्ञानी डा. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि अगले पांच दिनों में हल्के से मध्यम बादल छाए रहेंगे। शनिवार को तेज हवा चलने, गरज-चमक एवं धूल भरी आंधी के साथ स्थानीय स्तर पर हल्की वर्षा होने की संभावना है।
केरल में 27 मई को दस्तक देगा मानसून
भारतीय अर्थव्यवस्था एवं किसानों के लिए अच्छी खबर है कि इस बार मानसून का इंतजार लंबा नहीं करना पड़ेगा। मौसम विभाग ने बताया है कि केरल के तटवर्ती हिस्से में दक्षिण-पश्चिम मानसून का प्रवेश 27 मई को हो सकता है, जो पिछले वर्ष की तुलना में तीन दिन पहले है।
2009 में मानसून 23 मई को केरल पहुंचा था
पिछले वर्ष केरल में मानसून का आगमन 30 मई को हुआ था। वैसे केरल में मानसून के आने की अनुमानित तारीख एक जून है। अगर अनुमान के मुताबिक मानसून केरल पहुंचा तो यह 2009 के बाद सबसे जल्दी आगमन होगा। 2009 में मानसून 23 मई को केरल पहुंचा था।
105 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान
इस बार औसत से 105 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान है। जून से सितंबर के बीच मानसून के दौरान देशभर में वर्षा की स्थिति का ब्योरा पहले ही दे दिया गया है। केरल में प्रवेश के बाद मानसून धीरे-धीरे आगे बढ़ता है और मध्य जुलाई तक पूरे देश में फैल जाता है।
सितंबर के मध्य से इसकी वापसी भी शुरू हो जाती है और 15 अक्टूबर तक पूरी तरह वापसी हो जाती है। मौसम विभाग ने बताया है कि 13 मई को मानसून का आगमन दक्षिण अंडमान सागर में हो जाएगा। उसके बाद स्थितियां अगर अनुकूल रहीं तो अगले चार-पांच दिनों में अरब सागर, दक्षिण बंगाल की खाड़ी एवं निकोबार के पूरे इलाके को कवर कर सकता है।
सामान्य तौर पर 96 से 104 प्रतिशत के बीच की मानसूनी बारिश को सामान्य माना जाता है। इसी तरह 90 प्रतिशत से कम बारिश को कम और 105 प्रतिशत से अधिक को ज्यादा माना जाता है। मौसम विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि मानसून के आगमन की तिथि और पूरे मानसून मौसम के दौरान देशभर में कुल वर्षा के बीच कोई संबंध नहीं है।
देश के बाकी हिस्से में भी जल्दी या देर से आएगा मानसून पक्का नहीं
मौसम विज्ञानियों ने स्पष्ट किया है कि केरल में मानसून के जल्द या देरी से आने का अर्थ यह भी नहीं है कि देश के बाकी हिस्से में भी जल्दी या देर से आएगा। बीच में भी मौसम की स्थितियों एवं हवा की दिशा-गति के हिसाब से इसका मार्ग अवरुद्ध होता है। पिछले वर्ष भी केरल में अनुमान से एक दिन पहले आने के बाद भी मानसून अपनी दिशा भटक गया था और एक लंबे ब्रेक के बाद आगे बढ़ पाया था।