BRICS का आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त ऐलान, ट्रंप को भी भेजा कड़ा संदेश

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ब्रिक्स की आतंकवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया: पहलगाम हमले की निंदा, दोहरे मापदंडों को नकारा, वैश्विक सुधारों की उठी मांग

रियो डी जेनेरियो, 6 जुलाई: ब्रिक्स समूह ने शनिवार को जारी अपने ‘रियो घोषणापत्र’ में आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाते हुए जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले की तीखी निंदा की। समूह ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ साझा मोर्चा मजबूत करने, दोहरे मानदंड छोड़ने और आतंक के किसी भी रूप को कतई बर्दाश्त न करने की नीति पर जोर दिया।

दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के पहले दिन ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में ब्रिक्स के नेताओं ने आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही, फंडिंग और पनाहगाहों को लेकर भी चिंता जताई और इस पर ठोस कार्रवाई की मांग की।

मोदी का संदेश: यह हमला भारत नहीं, मानवता पर था
शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद को “मानवता की सबसे गंभीर चुनौती” बताया। उन्होंने पहलगाम हमले को भारत की आत्मा, गरिमा और पहचान पर सीधा हमला करार दिया और कहा कि यह हमला सिर्फ भारत नहीं, पूरी मानवता के खिलाफ था। मोदी ने इस दुख की घड़ी में भारत के साथ खड़े मित्र देशों का आभार भी जताया।

आतंकवाद पर दो टूक रुख
घोषणापत्र में कहा गया, “हम आतंकवाद को किसी भी रूप में बर्दाश्त न करने की नीति के प्रति प्रतिबद्ध हैं। हम आतंक के खिलाफ कार्रवाई में दोहरे मापदंडों को पूरी तरह खारिज करते हैं।”
ब्रिक्स ने यह भी स्पष्ट किया कि आतंकवाद से मुकाबले की जिम्मेदारी मुख्य रूप से हर देश की है, जिसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत पूरी तरह निभाया जाना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र द्वारा सूचीबद्ध सभी आतंकवादियों और संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई का भी आह्वान किया गया।

अमेरिका को परोक्ष संदेश, वैश्विक व्यवस्था पर चिंता
ब्रिक्स नेताओं ने विश्व व्यापार में बढ़ते टैरिफ और गैर-टैरिफ अवरोधों पर चिंता जताई। हालांकि किसी देश का नाम नहीं लिया गया, लेकिन इसे अमेरिका की संरक्षणवादी नीति पर परोक्ष टिप्पणी माना जा रहा है। घोषणापत्र में कहा गया कि ऐसे कदम वैश्विक व्यापारिक प्रणाली को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

साथ ही नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय प्रणाली में ध्रुवीकरण और विखंडन की बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर भी चिंता जाहिर की, जो वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा है।

फिलिस्तीन और वैश्विक प्रतिनिधित्व पर भी चर्चा
घोषणापत्र में कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों की स्थिति पर “गंभीर चिंता” जताई गई और क्षेत्र में शांति और समाधान की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘वैश्विक शासन में सुधार’ विषय पर बोलते हुए कहा कि 20वीं सदी में बनी वैश्विक संस्थाएं अब 21वीं सदी की चुनौतियों से जूझने में सक्षम नहीं हैं। उन्होंने कहा, “इन संस्थाओं में आज भी दो-तिहाई मानवता का समुचित प्रतिनिधित्व नहीं है। ऐसे संस्थान बिना नेटवर्क वाले मोबाइल फोन जैसे हैं — जो दिखते हैं, लेकिन काम नहीं करते।”

ब्रिक्स का यह रुख सिर्फ बयानबाज़ी नहीं, बल्कि विकासशील देशों की एकजुट और स्पष्ट आवाज़ है — आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई, वैश्विक प्रतिनिधित्व में सुधार और बहुपक्षीय व्यवस्था की रक्षा की साझा मांग।

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