ट्रंप-पुतिन वार्ता के बाद जेलेंस्की ने रखीं शांति की कड़ी शर्तें, यूरोपीय देशों ने दिया समर्थन

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ट्रंप-पुतिन की बहुचर्चित अलास्का वार्ता बिना किसी ठोस परिणाम के समाप्त होने के बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की का सख्त रुख सामने आया है।

उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि युद्धविराम केवल उनकी शर्तों पर ही संभव है और यूक्रेन अपनी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा। जेलेंस्की ने सोमवार को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि दोनों के बीच लंबी और सार्थक बातचीत हुई, जिसमें सुरक्षा गारंटी और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा हुई। जेलेंस्की ने जोर दिया कि “हमें स्थायी शांति चाहिए, अस्थायी विराम नहीं।”

जेलेंस्की की प्रमुख शर्तें

  • दोनों तरफ से हत्याएं और हमले पूरी तरह बंद हों।
  • रूसी सेना द्वारा हवाई और बंदरगाहों पर किए जा रहे हमले तत्काल रोकें जाएं।
  • रूस की कैद में रखे गए हजारों यूक्रेनी नागरिकों को रिहा किया जाए।
  • रूस द्वारा अगवा किए गए बच्चों की तुरंत वापसी हो।
  • यदि रूस आक्रामक रवैया जारी रखता है तो उस पर और कड़े प्रतिबंध लगाए जाएं।
  • अमेरिका और यूरोप की भागीदारी से यूक्रेन को दीर्घकालिक सुरक्षा गारंटी मिले।
  • यूक्रेन से जुड़े क्षेत्रीय मुद्दों पर कोई भी फैसला उसकी भागीदारी के बिना न लिया जाए।

यूरोपीय देशों का समर्थन

जेलेंस्की ने यूरोपीय नेताओं का आभार जताया जिन्होंने यूक्रेन की स्थिति को मजबूती देने वाला साझा बयान जारी किया। इस बयान में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारर समेत कई यूरोपीय नेताओं ने युद्ध खत्म होने तक रूस पर दबाव बनाए रखने का संकल्प दोहराया।

इस साझा बयान पर फिनलैंड के राष्ट्रपति एलेग्जेंडर स्टब, पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क, यूरोपीय काउंसिल के प्रमुख एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन के भी हस्ताक्षर हैं।

साझा बयान की मुख्य बातें

  • ट्रंप को जेलेंस्की से मिलकर त्रिपक्षीय शिखर वार्ता की दिशा में काम करना चाहिए।
  • यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की सुरक्षा की ठोस गारंटी दी जानी चाहिए।
  • यूक्रेन की सेना को सहयोग लेने की पूरी छूट होनी चाहिए।
  • यूक्रेन के नाटो और यूरोपीय संघ में शामिल होने पर रूस को वीटो का अधिकार नहीं मिलना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को बलपूर्वक नहीं बदला जा सकता और यूक्रेन को अपने क्षेत्रों के बारे में निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए।

यूरोपीय नेताओं ने यह भी दोहराया कि जब तक रूस हत्याएं और हमले बंद नहीं करता, उस पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव बनाए रखना जरूरी है।

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