भारत को पहली बार अमेरिका से मिलेगी परमाणु तकनीक; पांच साल की कोशिश के बाद रास्ता साफ

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अमेरिका से पहली बार भारत को मिलेगी परमाणु तकनीक।

देश के इतिहास में पहली बार अमेरिकी कंपनी भारत को अपनी परमाणु प्रौद्योगिकी हस्तांतरित करने जा रही है। अमेरिका की फ्लोसर्व कॉर्पोरेशन ने भारत की कोर एनर्जी सिस्टम्स लिमिटेड के साथ प्राइमरी कूलैंट पंप (पीसीपी) तकनीक के हस्तांतरण का समझौता किया है।

इस तकनीक की मदद से भारत 2047 तक परमाणु ऊर्जा से 100 गीगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य पूरा कर सकेगा। वर्तमान में देश में परमाणु संयंत्रों से केवल 8.2 गीगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है।

कोर एनर्जी सिस्टम्स के सीएमडी नागेश बसरकर ने बताया कि प्राइमरी कूलैंट पंप रिएक्टर के बाद सबसे महत्वपूर्ण उपकरण है और देश में इसकी आपूर्ति सीमित है। फ्लोसर्व इस क्षेत्र का मार्केट लीडर है और इसे सीएफआर 810 की स्वीकृति मिल चुकी है।

यह समझौता इस साल फरवरी में प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान दोनों देशों द्वारा अमेरिका-भारत 123 असैन्य परमाणु समझौते को पूरी तरह लागू करने के फैसले का हिस्सा है। बसरकर ने कहा कि इससे भविष्य में अमेरिका से और अधिक तकनीक भारत को मिलने का मार्ग खुलेगा। अमेरिका के परमाणु विभाग ने भी आश्वस्त किया है कि इसका इस्तेमाल केवल शांतिपूर्ण नागरिक उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

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