सुशांत सिंह राजपूत मौत केस: CBI ने क्लोजर रिपोर्ट दायर की, रिया चक्रवर्ती पर से हटा शक का साया

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सुशांत सिंह राजपूत मौत मामला: CBI ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की, रिया चक्रवर्ती को दी क्लीनचिट

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट अदालत में दाखिल कर दी है। रिपोर्ट में रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार को पूरी तरह क्लीनचिट दी गई है।

CBI ने यह रिपोर्ट दो अदालतों में जमा की है —

पटना कोर्ट में उस FIR के जवाब में, जो सुशांत के परिवार ने रिया और उनके परिवार के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाते हुए दर्ज कराई थी।

मुंबई कोर्ट में, जहां रिया ने सुशांत की बहन और परिवार के खिलाफ शिकायत दी थी।

पटना कोर्ट में 20 दिसंबर को क्लोजर रिपोर्ट पर सुनवाई होगी।

🔹 CBI की रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

जांच में पाया गया कि सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या की थी।

रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार की किसी भूमिका के सबूत नहीं मिले।

8 जून से 14 जून 2020 के बीच, जब यह घटना हुई, किसी भी आरोपी के सुशांत के साथ मौजूद होने के प्रमाण नहीं हैं।

रिया और उनका भाई शौविक 8 जून को सुशांत का घर छोड़ चुके थे और उसके बाद फ्लैट पर नहीं लौटे।

सुशांत ने 10 जून को शौविक से व्हाट्सएप पर बात की थी, लेकिन रिया से कोई बातचीत, कॉल या चैट नहीं हुई।

रिया या उनके परिवार से उस दौरान कोई मुलाकात या संपर्क का सबूत नहीं मिला।

सुशांत की मैनेजर श्रुति मोदी फरवरी 2020 से उनके फ्लैट पर नहीं गई थीं।

सुशांत की बहन मीतू सिंह 8 से 12 जून तक उनके साथ रहीं।

जांच में यह भी निष्कर्ष निकला कि किसी भी आरोपी ने सुशांत को आत्महत्या के लिए उकसाया, धमकाया या दबाव नहीं डाला।

🔹 फाइनेंशियल एंगल की जांच

रिया अपने भाई शौविक के साथ 8 जून को घर छोड़ते समय अपना लैपटॉप और एप्पल वॉच लेकर गई थीं, जो सुशांत की जानकारी में था।

सुशांत की संपत्ति या बैंक खाते से किसी तरह की अनधिकृत निकासी या धोखाधड़ी के प्रमाण नहीं मिले।

रिया और सुशांत अप्रैल 2018 से जून 2020 तक लिव-इन रिलेशनशिप में थे।

यूरोप ट्रिप (अक्टूबर 2019) के खर्चे सुशांत के कहने पर उनके मैनेजर ने बुक किए थे।

CBI ने कहा कि रिया पर हुए खर्च को IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत नहीं माना जा सकता, क्योंकि वह सुशांत की फैमिली का हिस्सा मानी जाती थीं।

रिया या उनके परिवार द्वारा किसी तरह की संपत्ति हड़पने, धमकी देने या आत्महत्या के लिए मजबूर करने के कोई सबूत नहीं मिले हैं।

CBI की इस रिपोर्ट के साथ, सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में करीब पांच साल बाद जांच औपचारिक रूप से समाप्त हो गई है।

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