उत्तर कोरिया ने क्रिप्टोकरेंसी हैक कर अरबों रुपये की चोरी की, साइबर हमला जारी

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उत्तर कोरिया के हैकर्स ने क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज और विदेशी कंपनियों को निशाना बनाकर अरबों डॉलर की चोरी की है।

अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार, यह अभियान उत्तर कोरिया सरकार के परमाणु हथियार कार्यक्रम को फंड देने के उद्देश्य से चलाया गया। 138 पृष्ठ की रिपोर्ट मल्टीलेटरल सैंक्शंस मॉनिटरिंग टीम ने जारी की है, जिसमें अमेरिका और 10 अन्य सहयोगी देशों ने भाग लिया।

रिपोर्ट में बताया गया कि उत्तर कोरियाई हैकर्स ने क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और हथियार खरीद के लिए किया, ताकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को दरकिनार किया जा सके। हैकर्स ने मैलवेयर के जरिए विदेशी कंपनियों और संगठनों के नेटवर्क में सेंध लगाई और संवेदनशील डेटा चुराया।

अलग-थलग देश होने के बावजूद उत्तर कोरिया ने साइबर हमलों में भारी निवेश किया है। इसकी हैकिंग क्षमता अब चीन और रूस जैसी बड़ी ताकतों के बराबर मानी जा रही है। अन्य देशों की तरह, उत्तर कोरिया साइबर ताकत का मुख्य उद्देश्य अपनी सरकार को फंड मुहैया कराना है। इसके हमलों ने कंप्यूटर सिस्टम को नुकसान पहुंचाया, निजी संपत्ति और लोगों की सुरक्षा को खतरे में डाला और अवैध हथियार तथा मिसाइल कार्यक्रम के लिए वित्तीय संसाधन जुटाए।

इस मॉनिटरिंग टीम में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन शामिल हैं।

इस साल की शुरुआत में, उत्तर कोरिया से जुड़े हैकर्स ने क्रिप्टो एक्सचेंज बायबिट से 1.5 अरब डॉलर की एथेरियम चोरी की, जो अब तक की सबसे बड़ी क्रिप्टो चोरी में शामिल है। एफबीआई ने इस चोरी को उत्तर कोरिया की खुफिया एजेंसी से जुड़े हैकर्स से जोड़ा।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी कंपनियों में काम करने वाले हजारों आईटी कर्मचारी वास्तव में नकली पहचान वाले उत्तर कोरियाई थे। ये कर्मचारी कंपनियों के इंटरनल सिस्टम तक पहुंच बनाकर अपनी तनख्वाह उत्तर कोरियाई सरकार को भेजते थे, और कई मामले में एक ही समय में कई रिमोट नौकरियों को अंजाम दे रहे थे। उत्तर कोरिया के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं दी है।

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