दमघोंटू हवा से जूझती दिल्ली को आज मिल सकती है राहत! मौसम अनुकूल रहा तो होगी कृत्रिम बारिश

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दमघोंटू हवा से जूझती दिल्ली में आज कृत्रिम बारिश की संभावना, मौसम अनुकूल रहा तो मिल सकती है राहत

दिवाली के बाद से लगातार आठ दिनों से दिल्ली की हवा “गंभीर” श्रेणी में बनी हुई है। बढ़ती सर्दी और घटती हवा की गति के बीच प्रदूषण का स्तर और बढ़ने की आशंका है। इसी बीच मंगलवार को दिल्ली में क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम बारिश) कराने की तैयारी की जा रही है, ताकि राजधानी को जहरीली हवा से फौरी राहत मिल सके।

कब और कैसे होगी क्लाउड सीडिंग?
अगर मौसम अनुकूल रहा और दृश्यता (विजिबिलिटी) सामान्य स्तर पर रही, तो मंगलवार को कृत्रिम बारिश के लिए विशेष विमान कानपुर से उड़ान भरेगा। इससे पहले दिल्ली के खेरा और बुराड़ी इलाके के बीच क्लाउड सीडिंग की ट्रायल उड़ान सफलतापूर्वक की जा चुकी है।

दिल्ली सरकार ने पहले ही संकेत दिया था कि 28 या 29 अक्टूबर को आर्टिफिशियल रेन की जा सकती है। वर्तमान में दिल्ली और एनसीआर के आसमान में बादल छाए हुए हैं, और अगर नमी का स्तर 50% के आसपास रहा तो क्लाउड सीडिंग शुरू कर दी जाएगी।

क्या है क्लाउड सीडिंग तकनीक?
क्लाउड सीडिंग एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें सिल्वर आयोडाइड (AgI) और सोडियम क्लोराइड (NaCl) जैसे रसायनों को विमान या ड्रोन के जरिए बादलों में छोड़ा जाता है। इससे बादलों में संघनन (condensation) की प्रक्रिया तेज होती है, और वे बारिश की बूंदों में बदल जाते हैं।

यह तकनीक बादल बनने की प्रक्रिया नहीं करती, बल्कि पहले से मौजूद बादलों में नमी को सक्रिय कर वर्षा कराती है। इसलिए क्लाउड सीडिंग तभी संभव है जब वातावरण में पर्याप्त बादल मौजूद हों।

पहली बार कब हुई थी कृत्रिम बारिश?
क्लाउड सीडिंग का पहला प्रयोग 13 नवंबर 1946 को अमेरिकी वैज्ञानिक डॉ. विंसेन शेफर्ड ने किया था। उन्होंने विमान से बादलों पर सूखी बर्फ (dry ice) फेंकी थी, जिससे बारिश हुई। बाद में वैज्ञानिकों ने सिल्वर आयोडाइड का इस्तेमाल कर यह प्रक्रिया और प्रभावी बनाई।

भारत में कब-कब हुई क्लाउड सीडिंग?
भारत में पहली बार 1980 के दशक में क्लाउड सीडिंग की गई थी।

  • 1983 और 1987: शुरुआती प्रयोग
  • 1993-94: तमिलनाडु में सूखे से राहत के लिए

कर्नाटक और महाराष्ट्र: पिछले वर्षों में भी बारिश बढ़ाने के लिए इस तकनीक का प्रयोग हो चुका है।

कितना आता है खर्च?
एक बार की क्लाउड सीडिंग प्रक्रिया पर औसतन 10 से 15 लाख रुपये प्रति उड़ान का खर्च आता है। हालांकि, इसका असर क्षेत्र और बादलों की स्थिति पर निर्भर करता है।

क्या मिलेगी राहत?
दिल्ली सरकार का कहना है कि कृत्रिम बारिश से एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) में अस्थायी सुधार हो सकता है। बारिश से हवा में मौजूद सूक्ष्म कण (PM2.5 और PM10) नीचे बैठ जाएंगे, जिससे लोगों को दमघोंटू प्रदूषण से कुछ घंटे या दिनभर की राहत मिल सकती है।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थायी समाधान नहीं, बल्कि प्रदूषण पर अस्थायी नियंत्रण का उपाय है। स्थायी राहत के लिए वाहनों के उत्सर्जन, पराली जलाने और औद्योगिक धुएं पर नियंत्रण जरूरी है।

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