मोकामा का रक्तरंजित इतिहास फिर सुर्खियों में: दुलारचंद हत्याकांड से अनंत सिंह-सूरजभान की पुरानी दुश्मनी फिर उभरी

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मोकामा… कभी रेल इंजनों की सीटी और फैक्ट्रियों की चहल-पहल से गूंजने वाला इलाका, आज अपने बारूद भरे अतीत की गूंज में डूबा है। कभी यह ‘उद्योग नगरी’ कहलाता था, लेकिन अब इसका नाम आते ही खून, गोलियों और गैंगवार की कहानी याद आती है।

उद्योग से अपराध तक का सफर
गंगा किनारे बसा टाल इलाका कभी हरियाली और मेहनत का प्रतीक था। लेकिन 1980 के दशक में अपराध ने धीरे-धीरे यहां पैर पसार लिए। जब बाकी बिहार लोकतंत्र और राजनीति की राह पर चल रहा था, मोकामा ने सत्ता और जमीन की लड़ाई बंदूकों से लड़ी। समय के साथ यह औद्योगिक इलाका अपराध, जातीय वर्चस्व और बदले की राजनीति का गढ़ बन गया।

अनंत सिंह और दुलारचंद: दो चेहरे, एक कहानी
लदमा गांव के अनंत सिंह — जिन्हें लोग ‘छोटे सरकार’ के नाम से जानते हैं — ने गोली से अपना वर्चस्व बनाया। भूमिहार समाज से आने वाले अनंत ने 1990 के दशक में राजनीति में कदम रखा और विधायक बने। जेडीयू से लेकर राजद तक कई पार्टियों में रहे, लेकिन उनकी पहचान हमेशा एक डॉन की ही रही। उन पर अपहरण, रंगदारी और हत्या जैसे 30 से अधिक केस दर्ज रहे। 2019 में उनके घर से AK-47 मिलने के बाद उन्हें 10 साल की सजा हुई, मगर 2024 में वे बरी हो गए।

दूसरी ओर, दुलारचंद यादव टाल क्षेत्र के ‘पुराने बादशाह’ कहे जाते थे। 1980 के दशक से ही वे इस इलाके की सत्ता का हिस्सा रहे। उन पर जमीन कब्जाने, फायरिंग और रंगदारी के कई आरोप लगे, लेकिन उनका असर कम नहीं हुआ। 76 साल की उम्र में भी वे सक्रिय थे और जनसुराज पार्टी के लिए प्रचार कर रहे थे।

खूनी अतीत फिर जागा
30 अक्टूबर 2025 की शाम घोसवारी में गोलियों की आवाज गूंजी और दुलारचंद यादव की हत्या हो गई। बताया जाता है कि घटना के वक्त वे अनंत सिंह के काफिले के पास थे। एफआईआर में अनंत सिंह और उनके समर्थकों के नाम दर्ज हैं, जबकि अनंत का आरोप है कि यह सूरजभान की साजिश है। इस हत्या ने मोकामा के उस पुराने जख्म को फिर से खोल दिया है, जहां राजनीति और अपराध की लकीर कभी साफ नहीं रही।

चुनाव और तनाव का संगम
पांच दिन बाद पहले चरण की वोटिंग है, लेकिन इलाके में सन्नाटा पसरा है। एक तरफ जेडीयू से अनंत सिंह, राजद से वीणा देवी और जनसुराज से पीयूष प्रियदर्शी मैदान में हैं। दूसरी तरफ दुलारचंद की हत्या ने चुनावी माहौल को हिंसा की दहलीज पर ला खड़ा किया है।

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