अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ते तनाव के बीच ओटावा में अमेरिकी राजदूत पीट होएकस्ट्रा ने मार्क कार्नी सरकार को खुली चेतावनी दी है।
होएकस्ट्रा ने कहा कि अगर कनाडा 88 F-35 फाइटर जेट खरीदने के फैसले से पीछे हटता है, तो अमेरिका कनाडा के साथ दशकों पुराने नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड (NORAD) समझौते में बदलाव कर सकता है। अमेरिकी राजदूत ने कहा कि फाइटर जेट डील में बदलाव की स्थिति में अमेरिका को अपने F-35 जेट कनाडा की सीमा के भीतर तैनात करने पड़ सकते हैं, ताकि सुरक्षा जरूरतों को पूरा किया जा सके।
कम जेट खरीदे तो बढ़ेगा अमेरिकी दखल
होएकस्ट्रा के मुताबिक, अगर कनाडा अपेक्षा से कम फाइटर जेट खरीदता है, तो अमेरिका को उन सुरक्षा कमियों को भरना होगा। इसका अर्थ यह हो सकता है कि अमेरिका खुद अतिरिक्त F-35 फाइटर जेट खरीदे और उन्हें कनाडाई एयरस्पेस में ऑपरेट करे। ऐसी स्थिति में NORAD की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव जरूरी हो सकता है।
NORAD पर क्यों पड़ सकता है असर?
नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड (NORAD) अमेरिका और कनाडा की साझा रक्षा व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य हवाई खतरों की निगरानी और जरूरत पड़ने पर त्वरित सैन्य प्रतिक्रिया देना है। मौजूदा समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे के एयरस्पेस में खतरों को ट्रैक और इंटरसेप्ट कर सकते हैं।
हालांकि, अमेरिकी राजदूत के बयान से संकेत मिलता है कि F-35 डील में बदलाव होने पर इस व्यवस्था की शर्तों पर दोबारा बातचीत हो सकती है।
F-35 डील की समीक्षा कर रहा है कनाडा
कनाडा ने 2022 में अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन के साथ 88 F-35A फाइटर जेट खरीदने का समझौता किया था। लेकिन 2025 में हुए शुरुआती ऑडिट में डील की लागत 19 अरब डॉलर से बढ़कर 27.7 अरब डॉलर तक पहुंचने की बात सामने आई।
इसी बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों और दोनों देशों के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव के कारण कार्नी सरकार ने साफ किया है कि वह इस सौदे की समीक्षा कर रही है।
स्वीडन के ग्रिपेन की ओर झुकाव
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कनाडा अब वैकल्पिक फाइटर जेट विकल्पों पर भी विचार कर रहा है। इसमें स्वीडन की कंपनी साब द्वारा बनाए जाने वाले JAS-39 ग्रिपेन E फाइटर जेट शामिल हैं।
साब ने कनाडा में ही जेट निर्माण की पेशकश की है, जिससे करीब 12,600 नौकरियां पैदा होने का दावा किया गया है।
स्वीडिश जेट पर अमेरिका की नाराजगी
होएकस्ट्रा ने ग्रिपेन जेट पर विचार को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि अगर कनाडा ऐसे फाइटर जेट चुनता है जो F-35 जितने इंटरऑपरेबल नहीं हैं, तो इससे NORAD की सामूहिक रक्षा क्षमता प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि ऐसे में अमेरिका को अपनी रक्षा रणनीति पर दोबारा विचार करना पड़ेगा।
कनाडा में बयान पर प्रतिक्रिया
कनाडा के रक्षा विशेषज्ञ और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार विंसेंट रिग्बी ने अमेरिकी राजदूत के बयान को गैर-जिम्मेदाराना बताया। उन्होंने कहा कि इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, लेकिन इसे ट्रंप प्रशासन या पेंटागन की आधिकारिक नीति भी नहीं माना जाना चाहिए।
डेनमार्क की चेतावनी
F-35 को लेकर डेनमार्क पहले ही सार्वजनिक तौर पर चिंता जता चुका है। डेनमार्क की संसद की रक्षा समिति के प्रमुख रासमस जारलोव ने कहा है कि F-35 जेट लंबे समय तक मरम्मत में रहते हैं और अमेरिका के पास पार्ट्स सप्लाई रोककर किसी देश की वायुसेना को कमजोर करने की क्षमता है।
दिसंबर में हुए एक कनाडाई सर्वे में 72 प्रतिशत लोगों ने F-35 की बजाय स्वीडन के ग्रिपेन जेट को प्राथमिकता देने की राय दी थी।
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