झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने देश में कोयला और खनिजों के साथ-साथ दाल-चावल जैसी जरूरी खाद्य वस्तुओं के महंगे होने पर चिंता जताई है।
उन्होंने केंद्रीय बजट 2026 को लेकर झारखंड की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि मौजूदा नीतियों से किसानों और आम लोगों की मुश्किलें बढ़ेंगी। गुरुवार देर शाम झारखंड मंत्रालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती को विदेशी बाजारों के लिए खोलना किसानों के साथ अन्याय है, जिससे देश में भुखमरी जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
किसानों की मुश्किलें बढ़ेंगी
हेमंत सोरेन ने कहा कि केंद्र सरकार जो बजट लेकर आई है, उसमें यह साफ नहीं है कि देश के वास्तविक विकास पर कितना खर्च होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यही नीतियां जारी रहीं तो देश में भुखमरी की स्थिति खड़ी हो सकती है।
उन्होंने कहा कि भारत के विकास में कृषि की हमेशा अहम भूमिका रही है, लेकिन अब कृषि क्षेत्र को भी विदेशी बाजारों के लिए खोल दिया गया है। विदेशों से आने वाले कृषि यंत्र और अनाज भारतीय बाजारों में बिकेंगे। ऐसे में सवाल है कि देश का किसान विदेशी उत्पादों से कैसे प्रतिस्पर्धा कर पाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका असर सिर्फ किसानों पर ही नहीं पड़ेगा, बल्कि कृषि से जुड़े मजदूरों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। व्यापार जगत पर इसके क्या प्रभाव होंगे, यह व्यापारी वर्ग बेहतर बता पाएगा, लेकिन किसानों और मजदूरों की परेशानियां निश्चित तौर पर बढ़ेंगी।
असम में झारखंड के आदिवासियों की स्थिति पर चिंता
हेमंत सोरेन ने असम में रह रहे झारखंड के आदिवासियों की स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि 100 से 150 साल से असम में रह रहे झारखंडी आदिवासी आज भी अपने हक-अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि आवाज उठाने पर उन्हें हिंसा का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश के भीतर ही अलग-अलग तरह की व्यवस्थाएं चल रही हैं, जहां एक वर्ग को अब भी बुनियादी अधिकारों के लिए लड़ना पड़ रहा है।
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