भारत ने गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की पहल ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में पर्यवेक्षक के रूप में हिस्सा लिया। हालांकि, देश इस बोर्ड का औपचारिक सदस्य नहीं है। बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व वाशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास की प्रभारी राजनयिक Namgya Khampa ने किया।
पिछले महीने दावोस में विश्व आर्थिक मंच में ट्रंप ने गाजा में शांति स्थापना के लिए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की रूपरेखा पेश की थी। उन्होंने कहा था कि यह संस्था सदस्य देशों को एक साझा मंच प्रदान करेगी और इसका मकसद वैश्विक शांति प्रयासों को बढ़ावा देना है। बैठक में लगभग 50 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें से 27 देश बोर्ड के पूर्ण सदस्य हैं, जिनमें अजरबैजान, बेलारूस, मिस्र, हंगरी, इंडोनेशिया, इजराइल, जॉर्डन, मोरक्को, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, तुर्की, यूएई, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं। भारत और यूरोपीय संघ जैसे अन्य देश पर्यवेक्षक के रूप में उपस्थित रहे।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने कहा कि भारत को अमेरिकी सरकार से बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण मिला है और इस प्रस्ताव पर फिलहाल विचार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत हमेशा से पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित करने वाली पहलों का समर्थन करता आया है।
बैठक में यह स्पष्ट हुआ कि भारत बोर्ड से जुड़ने के लिए इच्छुक है, भले ही फिलहाल वह पूर्ण सदस्य न हो।
इस बैठक में गाजा राहत के लिए नौ सदस्य देशों—कजाकिस्तान, अजरबैजान, यूएई, मोरक्को, बहरीन, कतर, सऊदी अरब, उज्बेकिस्तान और कुवैत—ने कुल 7 अरब डॉलर देने की सहमति जताई। ट्रंप ने अमेरिका की ओर से बोर्ड के लिए 10 अरब डॉलर देने की भी घोषणा की, हालांकि इस राशि के उपयोग का विवरण अभी स्पष्ट नहीं किया गया।
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