प्रयागराज की विशेष पॉक्सो अदालत ने शंकराचार्य Swami Avimukteshwaranand Saraswati के खिलाफ बटुकों से कथित यौन शोषण के आरोपों की जांच के लिए झूंसी थाने को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।
अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया है कि प्राप्त तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर विधिक प्रक्रिया के तहत जांच शुरू की जाए। यह आदेश बीएनएसएस की धारा 173(4) के तहत दायर एक आवेदन पर सुनवाई के बाद दिया गया। आवेदन आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज और अन्य की ओर से प्रस्तुत किया गया था। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम) विनोद कुमार चौरसिया की अदालत ने साक्ष्यों का अवलोकन करने और कथित पीड़ित बटुकों के बयान दर्ज करने के बाद आदेश सुरक्षित रखा था, जिसे अब जारी किया गया है।
याचिकाकर्ता ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 69, 74, 75, 76, 79 और 109 के साथ-साथ पॉक्सो अधिनियम की धाराओं 3, 5, 9 और 17 के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया था। अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए थाना प्रभारी झूंसी को नियमानुसार एफआईआर दर्ज कर जांच आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
अदालत के आदेश के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है और वे अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं। उन्होंने शिकायतकर्ता की पृष्ठभूमि पर सवाल उठाते हुए कहा कि आरोप लगाने वाले व्यक्ति का आपराधिक इतिहास रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वे कानूनी प्रक्रिया से पीछे हटने या मामले को समाप्त कराने की कोशिश नहीं करेंगे।
अब पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद मामले की औपचारिक जांच शुरू होगी और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय की जाएगी।
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