खामेनेई के निधन पर वैश्विक कूटनीतिक हलचल, ब्रिटेन-फ्रांस-रूस का बयान

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अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई में 28 फरवरी को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आने के बाद दुनिया भर में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। ईरान में जहां शोक और विरोध का माहौल है, वहीं वैश्विक शक्तियों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग रुख दिखा रही हैं।

अमेरिका का बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी मीडिया की पुष्टि से पहले ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खामेनेई की मौत की जानकारी दी। ट्रंप ने इसे “न्याय” बताते हुए कहा कि यह कदम उन लोगों के लिए इंसाफ है, जो उनके अनुसार ईरानी नेतृत्व की नीतियों से प्रभावित हुए।

अमेरिकी प्रशासन की ओर से इस कार्रवाई को रणनीतिक और आवश्यक बताया गया है।

रूस की कड़ी प्रतिक्रिया

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन को संदेश भेजकर संवेदना व्यक्त की। मॉस्को ने इस हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थायी प्रतिनिधि वासिली नेबेंजिया ने चेतावनी दी कि इस तरह की कार्रवाई से क्षेत्रीय संघर्ष और व्यापक हो सकता है।

चीन ने जताया विरोध

चीन के विदेश मंत्रालय ने हमले की निंदा करते हुए कहा कि यह ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा के खिलाफ है। बीजिंग ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला देते हुए सैन्य कार्रवाई रोकने और संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की।

जर्मनी का संतुलित रुख

जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि ईरान के लोगों को अपने भविष्य का फैसला स्वयं करने का अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि जर्मन सरकार अमेरिका और इजरायल सहित क्षेत्रीय साझेदारों के संपर्क में है और क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने इजरायल की सुरक्षा को लेकर जर्मनी की नीति दोहराई।

ब्रिटेन और फ्रांस की अपील

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने जर्मनी के साथ संयुक्त बयान जारी किया। तीनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि उन्होंने हमले में हिस्सा नहीं लिया, लेकिन वे स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए हैं।

संयुक्त बयान में ईरान से तनाव कम करने और बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की गई।

खामेनेई की मौत के बाद पश्चिम एशिया की स्थिति और संवेदनशील हो गई है। एक ओर अमेरिका इसे रणनीतिक सफलता बता रहा है, तो दूसरी ओर रूस और चीन जैसे देश इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ कदम मान रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि वैश्विक राजनीति इस घटना को किस दिशा में ले जाती है।

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