होर्मुज के बाहर भी तेल की लाइफलाइन: दुनिया के वो समुद्री रास्ते जहां से आता है बाकी 80% क्रूड

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इजरायल और अमेरिका के हमले के बाद पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव का असर अब पूरी दुनिया पर दिखने लगा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने रणनीतिक समुद्री मार्ग Strait of Hormuz को बंद कर दिया है।

अगर कोई जहाज इस रास्ते से गुजरने की कोशिश कर रहा है तो उस पर हमले की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। बुधवार को ईरान ने तीन जहाजों को निशाना बनाया। यह वही समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल गुजरता है। यही वजह है कि संघर्ष शुरू होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। तेल की कीमत करीब 30% तक बढ़कर 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है।

भारत में भी इसका असर धीरे-धीरे दिखने लगा है। देश के कुछ हिस्सों से एलपीजी की कमी की खबरें आ रही हैं। फिलहाल पेट्रोल-डीजल की सप्लाई सामान्य बताई जा रही है, लेकिन अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो इसका असर ईंधन की कीमतों और उपलब्धता पर भी पड़ सकता है।

समुद्री रास्तों से कैसे पहुंचता है तेल

U.S. Energy Information Administration (EIA) के मुताबिक, दुनिया का लगभग 76% कच्चा तेल और करीब 13% प्राकृतिक गैस समुद्री रास्तों से ट्रांसपोर्ट की जाती है।

EIA के आंकड़ों के अनुसार, 2025 की पहली छमाही में दुनिया भर में हर दिन लगभग 10.44 करोड़ बैरल कच्चा तेल सप्लाई हुआ। इसमें से करीब 8 करोड़ बैरल तेल समुद्री मार्गों से पहुंचाया गया।

होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना अहम

Strait of Hormuz ओमान और ईरान के बीच स्थित है और यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी तथा अरब सागर से जोड़ता है। यह इतना चौड़ा और गहरा है कि दुनिया के सबसे बड़े ऑयल टैंकर भी यहां से गुजर सकते हैं।

2025 की पहली छमाही में इस रास्ते से हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल गुजरा, जो दुनिया की कुल खपत का लगभग 20% है।

अगर यह मार्ग पूरी तरह बंद हो जाए तो विकल्प मौजूद हैं, लेकिन उनसे उतनी मात्रा में तेल सप्लाई नहीं हो सकती। उदाहरण के लिए, Saudi Aramco की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और यूएई की अबू धाबी पाइपलाइन से मिलाकर हर दिन लगभग 45-50 लाख बैरल तेल ही भेजा जा सकता है।

एशिया पर सबसे ज्यादा असर

होर्मुज से गुजरने वाला करीब 89% कच्चा तेल एशियाई बाजारों में जाता है। इनमें China, India, Japan और South Korea शामिल हैं। इसलिए अगर यह रास्ता बंद होता है तो सबसे ज्यादा असर एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ता है।

होर्मुज के अलावा तेल के बड़े समुद्री रास्ते
मलक्का स्ट्रेट

Strait of Malacca दुनिया का सबसे व्यस्त ऑयल चेकपॉइंट है। यहां से हर दिन लगभग 2.32 करोड़ बैरल तेल गुजरता है, जो वैश्विक सप्लाई का करीब 29% है।

स्वेज नहर और बाब अल-मंडेब

Suez Canal, SUMED Pipeline और Bab el‑Mandeb Strait मिलकर दुनिया के लगभग 11% तेल ट्रांजिट को संभालते हैं।

डेनिश स्ट्रेट

Danish Straits बाल्टिक सागर को नॉर्थ सागर से जोड़ते हैं। यहां से हर दिन करीब 49 लाख बैरल तेल गुजरता है, जो वैश्विक व्यापार का लगभग 6% है।

टर्किश स्ट्रेट

Bosporus Strait और Dardanelles मिलकर टर्किश स्ट्रेट बनाते हैं, जो ब्लैक सी को भूमध्य सागर से जोड़ते हैं। यहां से रोज करीब 37 लाख बैरल तेल गुजरता है।

पनामा नहर

Panama Canal प्रशांत और अटलांटिक महासागर को जोड़ती है। यहां से हर दिन लगभग 23 लाख बैरल तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई होती है।

केप ऑफ गुड होप

Cape of Good Hope कोई संकरा चेकपॉइंट नहीं है, लेकिन यह जहाजों के लिए एक बड़ा वैकल्पिक समुद्री मार्ग है। यहां से हर दिन करीब 91 लाख बैरल कच्चा तेल गुजरता है।

भारत के पास कितना तेल रिजर्व है

India अपनी जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट का बंद होना भारत के लिए चिंता की बात हो सकती है।

हालांकि भारत 40 से ज्यादा देशों से तेल आयात करता है और उसके पास रणनीतिक भंडार भी मौजूद है। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत के पास करीब 7–8 हफ्तों की जरूरत के बराबर तेल का रिजर्व है।

न्यूज एजेंसी Asian News International (ANI) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास करीब 25 करोड़ बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम का भंडार है।

यह रणनीतिक तेल भंडार Mangaluru, Padur और Visakhapatnam में जमीन के नीचे बने विशेष भंडारण केंद्रों में रखा जाता है। इसके अलावा टैंकों, पाइपलाइनों और जहाजों में भी तेल स्टोर किया जाता है।

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