ईरान के सांसद और संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा एवं विदेश नीति समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने पाकिस्तान की मध्यस्थता भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भले ही “मित्र और अच्छा पड़ोसी” है, लेकिन वह वार्ता के लिए उपयुक्त मध्यस्थ नहीं है और उसमें आवश्यक विश्वसनीयता की कमी है।
रेजाई का बयान
रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “पाकिस्तान हमारा मित्र है, लेकिन वह निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाने में सक्षम नहीं है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान अक्सर डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका के हितों को ध्यान में रखता है और उनके खिलाफ खुलकर नहीं बोलता।
रेजाई के मुताबिक, अमेरिका ने पहले पाकिस्तान के प्रस्ताव को स्वीकार किया था, लेकिन बाद में उससे पीछे हट गया। उन्होंने कहा, “एक मध्यस्थ को तटस्थ होना चाहिए, न कि किसी एक पक्ष की ओर झुका हुआ।”
यूरोप की ओर बढ़ता ईरान
इन टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि ईरान पाकिस्तान की मध्यस्थता पर भरोसा नहीं कर रहा, जबकि वह यूरोपीय देशों के साथ संवाद बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय हालात, युद्धविराम और जारी कूटनीतिक प्रयासों पर चर्चा की।
अराघची ने इस प्रक्रिया में यूरोप की “रचनात्मक भूमिका” पर जोर दिया, जबकि फ्रांस ने बातचीत जारी रखने का समर्थन दोहराया।
पाकिस्तान को बताईं शर्तें
इस बीच, क्षेत्रीय दौरे पर पाकिस्तान पहुंचे अराघची ने वहां के नेतृत्व को ईरान की शर्तों से अवगत कराया। इनमें शामिल हैं:
होर्मुज जलडमरूमध्य पर नई कानूनी व्यवस्था लागू करना
युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा
भविष्य में सैन्य कार्रवाई न होने की गारंटी
ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करना
रिपोर्ट्स के अनुसार, ये वार्ताएं परमाणु मुद्दे से अलग हैं और मुख्य रूप से क्षेत्रीय हालात पर केंद्रित हैं।
अराघची अब रूस रवाना हो चुके हैं, जबकि ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद से लौट गया है। इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को लेकर सख्त रुख दिखाते हुए चेतावनी दी है।
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