पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब समुद्री व्यापार और माल ढुलाई पर भी गहराने लगा है।
शिपिंग मंत्रालय के मुताबिक, क्षेत्र में बढ़ते जोखिम और अनिश्चितता के चलते कंटेनर, LPG और कच्चे तेल की ढुलाई का खर्च तेजी से बढ़ा है। सबसे बड़ा उछाल कंटेनर कार्गो में देखा गया, जहां भाड़ा करीब 10 गुना तक बढ़ गया।
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, कंटेनर शिपिंग का शुल्क 203 डॉलर प्रति ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट (TEU) से बढ़कर लगभग 2,000 डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं LPG की समुद्री ढुलाई दर 94 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 207 डॉलर प्रति टन हो गई, जबकि कच्चे तेल का भाड़ा 14 डॉलर से बढ़कर 28.6 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गया।
अधिकारियों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और समुद्री मार्गों पर खतरे के कारण शिपिंग कंपनियों ने शुल्क में भारी इजाफा किया है। शिपिंग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने बताया कि सरकार हालात पर लगातार नजर रख रही है और कीमतों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एडवाइजरी भी जारी की गई है।
तनाव का असर जहाजों की आवाजाही पर भी पड़ा है। भारतीय बंदरगाहों से पश्चिम एशिया जाने वाली औसत मासिक शिपिंग सेवाएं पहले 444 जहाजों तक थीं, जो अब घटकर करीब 125 रह गई हैं। इससे सप्लाई चेन और आयात-निर्यात कारोबार पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
मंत्रालय के मुताबिक, LPG के भाड़े में लगातार तेजी बनी हुई है, जबकि कंटेनर और कच्चे तेल की दरें अप्रैल के अंत में उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद अब कुछ नरम पड़ी हैं। अधिकारियों का कहना है कि संघर्ष समाप्त होने के बाद ही शिपिंग लागत में राहत मिलने की उम्मीद है।
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