Mark Zuckerberg Apologises: चाइल्ड एब्यूज कंटेंट और डीपफेक पर Meta की नाकामी स्वीकार

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मेटा (Meta) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जुकरबर्ग ने बुधवार को संसदीय समिति के समक्ष अपने प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM), डीपफेक कंटेंट और कुछ परिचालन संबंधी त्रुटियों को लेकर माफी मांगी। यह जानकारी समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से दी है।

सूत्रों के अनुसार, संसदीय समिति ने मेटा को स्पष्ट किया कि प्लेटफॉर्म की सामग्री के चयन और वितरण में उसकी सक्रिय भूमिका को देखते हुए उसे केवल “मध्यस्थ (Intermediary)” के रूप में नहीं देखा जा सकता। समिति ने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम के तहत मिलने वाले ‘सेफ हार्बर’ संरक्षण का प्रश्न भी उठता है।

भारत मेटा के लिए सबसे बड़े बाजारों में से एक है, जहां करोड़ों लोग फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप का उपयोग करते हैं। ऐसे में प्लेटफॉर्म पर कंटेंट मॉडरेशन और यूजर सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार की निगरानी लगातार बढ़ी है।

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो अस्थायी रूप से हटाए जाने का मुद्दा भी उठाया गया। यह वीडियो 23 जुलाई को छात्र-नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के संबोधन से जुड़ा था, जिसे फेसबुक और इंस्टाग्राम से कुछ समय के लिए हटा दिया गया था, लेकिन बाद में बहाल कर दिया गया।

सूत्रों के मुताबिक, संसदीय समिति ने इस घटना पर भी मेटा से जवाब मांगा था। कंपनी ने पहले इस मामले को तकनीकी गड़बड़ी बताते हुए खेद व्यक्त किया था और कहा था कि वीडियो गलती से हटाया गया था, जिसे बाद में प्लेटफॉर्म पर बहाल कर दिया गया। हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने उस स्पष्टीकरण को पर्याप्त नहीं माना था।

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने बैठक के दौरान बाल यौन शोषण सामग्री और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट प्रसारित करने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्मों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

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