ऑनलाइन भुगतान के बाद बढ़ता ठगी का खतरा, फ्रॉड कॉल और फर्जी डिलीवरी से सावधान

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डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल बढ़ने के साथ साइबर ठगी के नए तरीके भी सामने आ रहे हैं।

कॉमन कॉज और लोकनीति-सीएसडीएस की स्टेट ऑफ पुलिसिंग एंड पब्लिक सेंटिमेंट इन इंडिया (SPIR) 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, ऑनलाइन भुगतान का ज्यादा इस्तेमाल करने वाले लोगों को धोखाधड़ी वाले फोन आने की संभावना अधिक रहती है।

शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में करीब एक-तिहाई लोगों ने बताया कि उन्हें अक्सर फर्जी डिलीवरी या ज्यादा रिटर्न वाले निवेश के नाम पर ठगी के कॉल मिलते हैं। हालांकि, साइबर अपराध से निपटने की पुलिस की क्षमता को लेकर लोगों का भरोसा बना हुआ है। करीब 75 प्रतिशत लोगों ने माना कि पुलिस साइबर अपराध से निपटने के लिए तैयार है।

यह रिपोर्ट 16 राज्यों में किए गए सर्वे पर आधारित है। इसमें 8,306 लोगों से सवाल पूछे गए और साइबर अपराध से जुड़े 37 लोगों से विस्तृत बातचीत की गई। इनमें पीड़ित, विशेषज्ञ, पीड़ितों की सहायता करने वाले लोग और आरोपितों के परिजन शामिल थे।

पुलिस में शिकायत करने को लेकर क्या बोले पीड़ित?

सर्वे में 48 प्रतिशत लोगों ने कहा कि अगर भविष्य में वे साइबर अपराध का शिकार होते हैं तो पुलिस में शिकायत करेंगे। वहीं, साइबर अपराध के पीड़ितों में 51 प्रतिशत ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जबकि 11 प्रतिशत ने पुलिस से संपर्क किया लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ा।

शिकायत दर्ज कराने वाले करीब आधे पीड़ितों ने प्रक्रिया को मुश्किल बताया। वहीं, 27 प्रतिशत पीड़ितों ने पुलिस को रिश्वत देने की बात कही।

72% पीड़ितों को नहीं मिली रकम

डिजिटल वित्तीय ठगी के मामलों में रकम वापस पाने की स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण रही। रिपोर्ट के अनुसार, 72 प्रतिशत पीड़ित अपनी गंवाई हुई रकम वापस नहीं पा सके।

बैंकों की भूमिका को लेकर भी असंतोष सामने आया। 22 प्रतिशत पीड़ित बैंक की भूमिका से बहुत असंतुष्ट रहे, जबकि 20 प्रतिशत ने बैंक और पुलिस के बीच तालमेल को लेकर बहुत असंतोष जताया।

पुलिस की तैयारी पर भरोसा, लेकिन कार्रवाई में दिक्कत

रिपोर्ट में एक तरफ लोगों का पुलिस की क्षमता पर भरोसा दिखता है, तो दूसरी तरफ साइबर अपराध के बाद शिकायत और रकम की वापसी की प्रक्रिया में कई अड़चनें भी सामने आती हैं।

पुलिस की तैयारी को लेकर 75 प्रतिशत लोगों ने सकारात्मक राय दी। इनमें 29 प्रतिशत ने पुलिस को पूरी तरह तैयार और 44 प्रतिशत ने कुछ हद तक तैयार माना। आंकड़े संकेत देते हैं कि साइबर अपराध से निपटने को लेकर भरोसा मौजूद है, लेकिन पीड़ितों के लिए शिकायत दर्ज कराने और ठगी की रकम वापस पाने की प्रक्रिया अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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