जनगणना के दौरान सोशल मीडिया की चौबीसों घंटे होगी निगरानी, केंद्र ने जारी किए दिशा-निर्देश

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देश में जनगणना की तैयारियों के बीच केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और गलत सूचनाओं की निगरानी तेज करने के निर्देश दिए हैं।

भारत के रजिस्ट्रार जनरल (RGI) मृत्युंजय कुमार नारायण ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से ऐसे निगरानी केंद्र बनाए रखने को कहा है, जो इंटरनेट मीडिया पर चौबीसों घंटे नजर रखें। इसका मकसद जनगणना से जुड़ी भ्रामक खबरों की पहचान कर समय रहते उनका खंडन करना है।

जनगणना पर गलत जानकारी फैलाने वालों पर रहेगी नजर
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया गया है कि जनगणना से संबंधित किसी भी अफवाह, गलत दावे या स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाली गलतफहमी पर तुरंत कार्रवाई की जाए। इसके लिए संबंधित अधिकारी तथ्य-जांच कर सही जानकारी लोगों तक पहुंचाएंगे।

जनगणना के दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना की शुरुआत से पहले लोगों को इसकी प्रक्रिया के बारे में जागरूक करने के लिए व्यापक प्रचार अभियान चलाने पर भी जोर दिया गया है।

दो चरणों में पूरी होगी जनगणना की प्रक्रिया
देश में जनगणना दो चरणों में कराई जा रही है। पहले चरण में मकानों की सूची तैयार करने और आवास संबंधी जानकारी जुटाने का काम होगा। दूसरे चरण में घर-घर जाकर लोगों की गणना की जाएगी और उनसे आवश्यक जानकारी ली जाएगी।

इस दौरान नागरिकों को डिजिटल सेल्फ-एन्यूमरेशन की सुविधा के बारे में भी बताया जाएगा। इसके जरिए लोग ऑनलाइन अपनी जानकारी खुद दर्ज कर सकेंगे। जागरूकता अभियान में यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि जनगणना कर्मचारी घर आने पर किस तरह के सवाल पूछेंगे।

व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता पर दिया जाएगा जोर
अधिकारियों को लोगों को यह समझाने के लिए कहा गया है कि जनगणना के दौरान जुटाई गई व्यक्तिगत जानकारी कानून के तहत गोपनीय रखी जाती है। इसका उद्देश्य नागरिकों की आशंकाएं दूर करना और जनगणना प्रक्रिया में उनका भरोसा बढ़ाना है।

अखबार, टीवी और WhatsApp से होगा प्रचार
जनगणना को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत अखबारों, टेलीविजन विज्ञापनों, डिजिटल सिनेमा स्क्रीन, मोबाइल ऐप और परिवहन माध्यमों का इस्तेमाल किया जाएगा।

इसके अलावा, जनगणना से संबंधित वीडियो और गलतफहमियां दूर करने वाली सामग्री WhatsApp और SMS के जरिए भी लोगों तक पहुंचाई जाएगी। राज्यों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार प्रचार अभियान तैयार करने की सलाह दी गई है, ताकि नागरिकों को जनगणना की प्रक्रिया और उसके महत्व की सही जानकारी मिल सके।

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