एक साल बाद वेनेजुएला लौटीं नोबेल विजेता मचाडो, मादुरो के शासन में गिरफ्तारी से बचने के लिए रहीं छिपकर
वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मारिया कोरिना मचाडो करीब एक साल तक देश से बाहर रहने के बाद रविवार को अपने वतन लौट आईं। उनकी वापसी को वेनेजुएला में लोकतांत्रिक बदलाव और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष राष्ट्रपति चुनावों की मांग से जोड़कर देखा जा रहा है।
मचाडो के प्रवक्ता डेविड स्मोलांस्की ने इसे लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह वापसी निकट भविष्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की कोशिशों को भी गति दे सकती है। मचाडो पिछले तीन वर्षों से विपक्ष का नेतृत्व कर रही हैं और गिरफ्तारी की आशंका के चलते लंबे समय तक देश के भीतर गुप्त ठिकानों पर रही थीं।
नोबेल शांति पुरस्कार के लिए छोड़ा था देश
मचाडो ने पिछले साल नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त करने के लिए वेनेजुएला छोड़ा था। इसके बाद देश की राजनीति में कई बड़े घटनाक्रम सामने आए। खबर के अनुसार, जनवरी में अमेरिका ने काराकास में निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने मादुरो सरकार में शामिल रहीं डेल्सी रोड्रिगेज को राष्ट्रपति पद पर नियुक्त किया।
इन घटनाओं के बाद मचाडो और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के प्रशासन के बीच तनाव बढ़ने की खबरें सामने आईं। मचाडो लगातार वेनेजुएला लौटने और देश में स्वतंत्र चुनाव कराने की मांग करती रही हैं।
सोशल मीडिया पर दी वापसी की जानकारी
हाल ही में द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में मचाडो ने कहा था कि उनकी वतन वापसी उम्मीद से पहले हो सकती है। रविवार को उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मैं यहां हूं। आप सभी के साथ।”
उनकी पार्टी ने भी लारा राज्य के एक चर्च में उनकी तस्वीरें साझा कीं, जिन्हें उनके देश लौटने की पुष्टि के तौर पर पेश किया गया।
मचाडो की वापसी ऐसे समय हुई है, जब वेनेजुएला में राजनीतिक नेतृत्व, लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अब उनकी आगे की राजनीतिक भूमिका और सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।
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