रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप में भारत के हथियारों की मांग बढ़ी, गोला-बारूद निर्यात में 1600% से ज्यादा उछाल
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध ने यूरोप में गोला-बारूद की मांग बढ़ा दी है। इसका फायदा भारतीय रक्षा उद्योग को मिला है। रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के बाद के चार वर्षों में भारत ने यूरोपीय देशों को 87.2 करोड़ डॉलर मूल्य के गोला-बारूद और संबंधित उत्पादों का निर्यात किया। इसके मुकाबले युद्ध से पहले के चार वर्षों में यह निर्यात महज 4.92 करोड़ डॉलर का था।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में यूरोप को भारत के गोला-बारूद निर्यात में 1,600 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। यह उछाल वैश्विक रक्षा बाजार में भारतीय कंपनियों की बढ़ती मौजूदगी को दर्शाता है।
मध्य और पूर्वी यूरोप में भारत बना प्रमुख आपूर्तिकर्ता
आंकड़ों के मुताबिक, भारत मध्य और पूर्वी यूरोप के 13 देशों को गोला-बारूद और संबंधित उत्पादों की आपूर्ति करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। इस श्रेणी में दक्षिण कोरिया पहले स्थान पर है। भारत के कुल निर्यात का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं देशों को गया।
भारत से निर्यात किए जाने वाले उत्पादों में मुख्य रूप से आर्टिलरी शेल, मोर्टार शेल, प्रोपेलेंट और विस्फोटक शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस निर्यात में लड़ाकू विमान या मिसाइलें शामिल नहीं थीं।
यूक्रेन युद्ध ने बढ़ाई यूरोप की सैन्य जरूरतें
फरवरी 2022 में रूस के पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के बाद यूरोपीय देशों ने अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने और हथियारों के भंडार को दोबारा भरने पर जोर दिया है। साथ ही, यूक्रेन को सैन्य सहायता जारी रखने के कारण गोला-बारूद की जरूरत भी बढ़ी है।
यूरोप में बढ़ती मांग ने भारतीय रक्षा निर्माताओं के लिए नए कारोबारी अवसर पैदा किए हैं। हालांकि, निर्यात में वृद्धि का अर्थ यह नहीं है कि भारत सीधे युद्ध में शामिल पक्षों को ही हथियारों की आपूर्ति कर रहा है। निर्यात के गंतव्य और उत्पादों के अंतिम उपयोग को अलग-अलग समझना जरूरी है।
भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर
भारत के कुल रक्षा निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में देश का रक्षा निर्यात बढ़कर रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 23,622 करोड़ रुपये था।
इस तरह एक वर्ष में रक्षा निर्यात में 14,802 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह आंकड़ा भारतीय रक्षा उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय मांग में विस्तार को रेखांकित करता है।
आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिल रहा बढ़ावा
भारतीय रक्षा उद्योग की बढ़ती निर्यात क्षमता को आत्मनिर्भर भारत अभियान और घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन देने वाली नीतियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। यूरोप में गोला-बारूद की मांग ने भारतीय कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी जगह मजबूत करने का अवसर उपलब्ध कराया है।
आने वाले समय में भारत की निर्यात वृद्धि इस बात पर निर्भर करेगी कि घरेलू रक्षा कंपनियां उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता, समय पर आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को कितना मजबूत कर पाती हैं।
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