ट्रंप की कोशिशों के बीच मेलानिया की पहल से ओलेश्की में युद्धविराम! पोप लियो की मध्यस्थता से राहत की उम्मीद
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को समाप्त कराने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की कोशिशें अब तक निर्णायक नतीजे तक नहीं पहुंच सकी हैं। इस बीच, उनकी पत्नी और अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप की पहल से रूसी कब्जे वाले यूक्रेनी कस्बे ओलेश्की में अस्थायी युद्धविराम का रास्ता खुलने की खबर है। पोप लियो की भागीदारी से हुई इस पहल के तहत एक नवंबर तक युद्धविराम लागू रहने की बात कही गई है। इससे प्रभावित नागरिकों तक भोजन और दवाएं पहुंचाने तथा वहां से निकलने के इच्छुक लोगों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराने की उम्मीद है।
मेलानिया इससे पहले भी रूस के कब्जे में मौजूद यूक्रेनी बच्चों की स्वदेश वापसी के प्रयासों में शामिल रही हैं। ओलेश्की में उनकी ताजा पहल ऐसे समय सामने आई है, जब युद्ध के कारण स्थानीय आबादी बुनियादी सुविधाओं के गंभीर संकट का सामना कर रही है।
भोजन और दवाओं के लिए तरस रहे लोग
दक्षिणी खेरसान क्षेत्र में नीपर नदी के पूर्वी तट पर स्थित ओलेश्की में हालात बेहद खराब बताए जा रहे हैं। स्थानीय निवासियों के मुताबिक, भोजन, दवाओं और बिजली, पानी तथा गैस जैसी आवश्यक सुविधाओं की कमी ने जीवन कठिन बना दिया है। कुछ लोगों को दिनभर में केवल एक कटोरी चावल या कुट्टू खाकर गुजारा करना पड़ रहा है। कभी-कभी वे इसमें टमाटर, खीरा या जंगली साग मिलाकर खाते हैं।
युद्धविराम से मानवीय सहायता पहुंचाने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, राहत सामग्री की आपूर्ति और नागरिकों की सुरक्षित निकासी के लिए जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं करना जरूरी होगा।
रूसी कब्जे और बाढ़ ने उजाड़ दिया कस्बा
ओलेश्की पर रूसी सेना ने फरवरी 2022 में कब्जा कर लिया था। युद्ध से पहले यहां करीब 24 हजार लोग रहते थे, लेकिन अब आबादी घटकर कुछ हजार रह जाने की बात कही जा रही है।
जून 2023 में काखोव्का बांध टूटने से आई भीषण बाढ़ ने भी कस्बे और आसपास के इलाकों को भारी नुकसान पहुंचाया था। युद्ध और बुनियादी ढांचे की तबाही ने स्थानीय लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
भोजन और पानी की तलाश में बाहर निकलना भी जोखिम भरा है। इलाके की कई सड़कों पर बारूदी सुरंगों का खतरा बना हुआ है। स्थानीय लोग एक खतरनाक मार्ग को ‘मौत की सड़क’ कहते हैं।
मानवीय गलियारे बनाने की तैयारी, लेकिन ड्रोन का खतरा बरकरार
युद्धविराम के तहत दोनों पक्षों की ओर से राहत सामग्री पहुंचाने और नागरिकों की आवाजाही के लिए मानवीय गलियारे बनाने की बात कही गई है। इसके लिए कुछ मार्गों से बारूदी सुरंगों को हटाना जरूरी होगा, जिसमें कई दिन लग सकते हैं।
हालांकि, अस्थायी युद्धविराम के बावजूद ड्रोन हमलों का खतरा बना हुआ है। ऐसे में राहत अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि युद्धविराम का पालन किस हद तक होता है और सुरक्षित रास्तों को कितनी जल्दी तैयार किया जा सकता है।
ओलेश्की में युद्धविराम के बीच कीव पर रूसी हमला
ओलेश्की में स्थानीय स्तर पर युद्धविराम की पहल के बीच रूस ने मंगलवार रात यूक्रेन की राजधानी कीव पर फिर मिसाइल हमले किए। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि देश के 10 अन्य क्षेत्रों में ऊर्जा केंद्रों, रसद व्यवस्था और बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया गया।
इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि एक छोटे इलाके में युद्धविराम की पहल और व्यापक रूस-यूक्रेन युद्ध की स्थिति अलग-अलग बनी हुई है।
पुतिन से बातचीत, लेकिन युद्ध समाप्ति पर सहमति दूर
इस बीच, फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बातचीत की। इसके बाद दोनों नेताओं ने यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की से भी चर्चा की।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास जारी रहने के बावजूद युद्ध समाप्त करने पर सहमति बनना मुश्किल दिखाई दे रहा है। रूस ने दोनेत्स्क क्षेत्र के शेष 20 प्रतिशत हिस्से से यूक्रेनी सेना की वापसी की मांग की है, जबकि क्षेत्रीय नियंत्रण और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे वार्ता में बड़ी बाधा बने हुए हैं।
ओलेश्की में प्रस्तावित अस्थायी युद्धविराम स्थानीय नागरिकों के लिए राहत की उम्मीद जरूर पैदा करता है, लेकिन इसे रूस और यूक्रेन के बीच व्यापक शांति समझौते की शुरुआत मानना अभी जल्दबाजी होगी।
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