दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों से कारोबार ठप, व्यापारियों का अल्टीमेटम- भैया दूज तक समाधान नहीं तो प्रशासन को सौंपेंगे दुकानों की चाबी

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दिल्ली में रैलियों से व्यापारियों को करोड़ों का नुकसान, भैया दूज तक प्रदर्शन नहीं रुके तो दुकानों की चाबियां सौंपेंगे

दिल्ली में लगातार हो रहे धरना-प्रदर्शनों और राजनीतिक रैलियों के चलते कारोबार प्रभावित होने से व्यापारी नाराज हैं। जुलाई से अक्टूबर तक अलग-अलग इलाकों में हुए प्रदर्शनों और यातायात जाम ने बाजारों की रौनक कम कर दी है। अब व्यापारियों ने प्रशासन के सामने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए आंदोलन आयोजकों को दुकानों की चाबियां सौंपने की चेतावनी दी है।

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने कहा है कि यदि 11 नवंबर यानी भैया दूज तक राजधानी में रैलियों और प्रदर्शनों पर रोक नहीं लगाई गई, तो व्यापारी अपनी दुकानों की चाबियां प्रदर्शनकारियों को सौंप देंगे। संगठन ने यह भी सुझाव दिया है कि बड़े धरना-प्रदर्शनों के लिए बुराड़ी, अलीपुर और यमुना खादर जैसे वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए जाएं।

दिल्ली पुलिस आयुक्त को लिखा पत्र

CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर त्योहारों के दौरान प्रमुख कारोबारी क्षेत्रों में रैली और विरोध मार्च की अनुमति नहीं देने की मांग की है। इनमें कनॉट प्लेस, जंतर-मंतर, रामलीला मैदान, इंडिया गेट, राजघाट, मध्य दिल्ली और पुरानी दिल्ली के बाजार शामिल हैं।

CTI का दावा है कि 1 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच धरना-प्रदर्शनों और रैलियों के कारण दिल्ली के व्यापार को करीब 14 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। व्यापारियों के मुताबिक, जाम और रास्ते बंद होने से ग्राहक बाजारों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिसका सीधा असर बिक्री पर पड़ रहा है।

रामलीला मैदान की रैली से 11 हजार करोड़ का कारोबार प्रभावित

बृजेश गोयल के अनुसार, 1 से 30 अक्टूबर के बीच जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस के आसपास रोजाना लगने वाले जाम से लगभग 3 हजार करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ। वहीं, 1 नवंबर को रामलीला मैदान में आयोजित महारैली के कारण एक ही दिन में करीब 11 हजार करोड़ रुपये का व्यापार प्रभावित होने का अनुमान है।

संगठन के मुताबिक, इस आयोजन के चलते चांदनी चौक, सदर बाजार, करोल बाग और कनॉट प्लेस समेत प्रमुख बाजारों की लगभग 2.5 लाख दुकानें बंद रहीं। इससे 8,800 करोड़ रुपये का खुदरा और थोक कारोबार प्रभावित हुआ।

इसके अलावा ट्रांसपोर्ट क्षेत्र को 1,500 करोड़ रुपये, होटल और सेवा क्षेत्र को 500 करोड़ रुपये तथा दिहाड़ी मजदूरों को करीब 200 करोड़ रुपये का नुकसान होने का दावा किया गया है।

त्योहारों की कमाई पर संकट

व्यापारियों की चिंता इसलिए बढ़ गई है क्योंकि 6 से 11 नवंबर के बीच धनतेरस, दीपावली और भैया दूज जैसे बड़े त्योहार पड़ रहे हैं। यह समय दिल्ली के कारोबारियों के लिए साल का सबसे महत्वपूर्ण बिक्री सीजन माना जाता है।

CTI ने चेतावनी दी है कि यदि इस दौरान भी प्रदर्शन और रैलियां जारी रहीं, तो दिल्ली के करीब 20 लाख व्यापारियों के कारोबार पर गंभीर असर पड़ सकता है। संगठन ने प्रशासन से अपील की है कि त्योहारों के दौरान बाजारों में सामान्य आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियां सुनिश्चित की जाएं।

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