नेपाल से लेकर लंदन तक, क्यों उठ रही सरकार विरोधी लहर?
हाल के महीनों में दक्षिण एशिया और यूरोप में सरकार विरोधी प्रदर्शनों की एक नई लहर देखी जा रही है। बांग्लादेश, नेपाल और अब ब्रिटेन—तीनों जगह लाखों लोग सड़कों पर उतरे हैं। मकसद एक ही है—सरकार की नीतियों से असंतोष और सत्ता परिवर्तन की मांग।
बांग्लादेश: शेख हसीना की विदाई
अगस्त 2024 में ढाका से शुरू हुए छात्र आंदोलनों ने शेख हसीना सरकार को उखाड़ फेंका। शुरुआत सरकारी नौकरी की कोटा प्रणाली के विरोध से हुई थी, लेकिन जल्द ही यह राष्ट्रव्यापी विद्रोह में बदल गया। हिंसक झड़पों और जनदबाव के बीच अंतरिम सरकार बनी, जिसका नेतृत्व नोबेल विजेता अर्थशास्त्री मुहम्मद यूनुस कर रहे हैं।
नेपाल: Gen-Z का आंदोलन
सितंबर 2025 में नेपाल में Gen-Z की अगुवाई वाले प्रदर्शनों ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया। संसद से लेकर नेताओं के घरों तक पर धावा बोला गया और देशव्यापी हिंसा में 50 से अधिक लोगों की मौत हुई। इसके बाद कार्की देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं।
ब्रिटेन: “यूनाइट द किंगडम” रैली
13 सितंबर को लंदन में हुए विरोध को ब्रिटेन के इतिहास का सबसे बड़ा प्रदर्शन बताया जा रहा है। एक लाख से अधिक लोग आव्रजन और सेंसरशिप नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे। टॉमी रॉबिन्सन की अगुवाई में हुए इस मार्च में हिंसा भी हुई और कई पुलिसकर्मी घायल हुए। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के इस्तीफे की मांग की।
एक जैसी तस्वीर क्यों?
तीनों देशों में प्रदर्शनों की वजहें अलग-अलग थीं, लेकिन संदेश एक ही था—जनता अब अपनी आवाज दबने नहीं देगी।
बांग्लादेश में नौकरी कोटा प्रणाली
नेपाल में युवाओं का असंतोष और बेरोजगारी
ब्रिटेन में आव्रजन और सेंसरशिप मुद्दे
विशेषज्ञ मानते हैं कि सोशल मीडिया ने इन आंदोलनों को ताकत दी और दुनिया भर में विरोध प्रदर्शनों की आवाज़ को जोड़ने का काम किया।
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