थाईलैंड के आम चुनाव में प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नवीराकुल की सत्तारूढ़ भूमजाईथाई पार्टी ने तीन-तरफा मुकाबले में निर्णायक बढ़त बना ली है।
चुनाव आयोग के शुरुआती रुझानों के मुताबिक करीब 80 प्रतिशत मतदान केंद्रों की गिनती के बाद भूमजाईथाई पार्टी अपने प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों से काफी आगे चल रही है, जिससे सरकार गठन और गठबंधन की राह आसान होती नजर आ रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिसंबर में कंबोडिया सीमा विवाद के बाद कराए गए इस आकस्मिक चुनाव का समय राष्ट्रवाद की भावना को भुनाने के उद्देश्य से चुना गया था। पूर्व प्रधानमंत्री पैटोंगतार्न शिनावात्रा के पदच्युत होने के बाद सत्ता संभालने वाले अनुतिन ने 100 दिनों से भी कम समय में आम चुनाव कराने का फैसला लिया था।
पीपुल्स पार्टी दूसरे स्थान पर
चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में बढ़त के दावे करने वाली प्रगतिशील पीपुल्स पार्टी फिलहाल दूसरे स्थान पर खिसकती दिख रही है। पार्टी नेता नत्थाफोंग रुआंगपन्यावुत ने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी भूमजाईथाई के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल नहीं होगी और विपक्ष में बैठने का फैसला किया है। वहीं, शिनावात्रा परिवार की फेउ थाई पार्टी तीसरे स्थान पर रही है।
सीटों के अनुमान और रुझान
चुनावी अभियान के दौरान ओपिनियन पोल में पीपुल्स पार्टी को सबसे आगे बताया जा रहा था, लेकिन नतीजे इससे अलग संकेत दे रहे हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेवलपमेंट एडमिनिस्ट्रेशन (NIDA) के सर्वे के अनुसार, 500 सदस्यीय हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भूमजाईथाई पार्टी को 140 से 150 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि पीपुल्स पार्टी को 125 से 135 सीटें मिल सकती हैं।
संविधान संशोधन को मिला जनसमर्थन
चुनाव के साथ कराए गए जनमत संग्रह में मतदाताओं ने नए संविधान के मसौदे के पक्ष में लगभग दो-तिहाई बहुमत से समर्थन दिया है। मौजूदा 2017 का संविधान सैन्य समर्थित दस्तावेज माना जाता है और लंबे समय से सत्ता के केंद्रीकरण को लेकर इसकी आलोचना होती रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक यदि नए संविधान की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो इसके लिए संसद में संशोधन के साथ दो और जनमत संग्रह कराने होंगे। उनका कहना है कि चुनाव परिणाम और संविधान सुधार की दिशा थाईलैंड की राजनीतिक स्थिरता और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर दूरगामी प्रभाव डाल सकती है।
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