बांग्लादेश में एक बार फिर छात्र आंदोलन ने जोर पकड़ लिया है। राजधानी ढाका में मोहम्मद यूनुस के आवास के बाहर बुधवार को इंजीनियरिंग छात्रों और पुलिस के बीच हुई झड़प में 50 से अधिक लोग घायल हो गए। इनमें आठ पुलिसकर्मी भी शामिल हैं, जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है।
यूनुस सरकार के खिलाफ नाराजगी
छात्रों का गुस्सा नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के खिलाफ है। उनकी शिकायत है कि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने ढाका के शाहबाग चौराहे पर जाम लगाकर विरोध किया और यूनुस के आवास की ओर बढ़ने लगे। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए आंसू गैस, साउंड ग्रेनेड और पानी की बौछार का इस्तेमाल किया, जिसके बाद हिंसक झड़प छिड़ गई।
छात्रों की तीन प्रमुख मांगें
डिप्लोमा इंजीनियरों को ‘इंजीनियर’ की उपाधि से रोकना
डिप्लोमा इंजीनियरों की नौवीं ग्रेड में पदोन्नति पर रोक
स्नातक इंजीनियरों को दसवीं ग्रेड में प्राथमिकता देना
इन मांगों को लेकर छात्रों और सरकार के बीच हुई बैठक भी बेनतीजा रही।
इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय बंद करने का ऐलान
झड़प के बाद छात्र संगठनों ने देशभर में इंजीनियरिंग विश्वविद्यालयों को बंद करने का ऐलान कर दिया है। इससे माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया है।
पिछले साल के आंदोलन की यादें ताजा
गौरतलब है कि जुलाई–अगस्त 2024 में आरक्षण विरोधी छात्र आंदोलन ने बड़े पैमाने पर हिंसा का रूप ले लिया था, जिसके चलते 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना की सरकार गिर गई थी और अंतरिम सरकार का गठन हुआ था। लेकिन एक साल बाद भी हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं और यूनुस सरकार के खिलाफ असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
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