देश में कैंसर के मामलों, विशेषकर ओरल और ब्रेस्ट कैंसर में तेजी से वृद्धि दर्ज की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती जीवनशैली, तंबाकू का बढ़ता उपयोग, देर से निदान और पर्यावरणीय कारक इस बढ़ते खतरे के प्रमुख कारण हैं। पद्मश्री से सम्मानित हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. मैमन चांडी ने चेताया कि कैंसर की यह बढ़ती प्रवृत्ति भारत के लिए गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही है।
ओरल कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे
डॉ. चांडी के अनुसार, 1990 से 2021 के बीच देश में ओरल कैंसर की मृत्यु दर 5.32 से बढ़कर 5.92 प्रति एक लाख हो गई। डिज़ेबिलिटी एडजस्टेड लाइफ ईयर्स (DALY) भी 152.94 से 163.61 तक पहुंच गया है। उनका कहना है कि 2022 से 2031 के बीच ओरल कैंसर की घटनाओं में और बढ़ोतरी की आशंका है। अनुमान है कि 2031 तक आयु-मानकीकृत घटना दर (ASPR) 10.15 प्रति 1 लाख और मृत्यु दर 29.38 प्रति 1 लाख तक पहुंच सकती है। पुरुषों में इसकी दर लगातार महिलाओं की तुलना में अधिक बनी हुई है।
ब्रेस्ट कैंसर में भी तेज़ उछाल
डॉ. चांडी ने बताया कि वैश्विक स्तर पर ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में सबसे आम कैंसर बन चुका है। भारत में भी 1990 से 2016 के बीच इसकी ASPR लगभग 40% बढ़ी है और सभी राज्यों में मामलों में इजाफा देखा गया है।
इसके पीछे मोटापा, मद्यपान, बदलती जीवनशैली, देर से गर्भधारण और बेहतर स्क्रीनिंग सुविधाओं जैसे कारक जिम्मेदार हैं।
भारत कैंसर जीनोम एटलस की पहल
कैंसर जीनोमिक्स पर बात करते हुए उन्होंने IIT मद्रास की ओर से शुरू भारत कैंसर जीनोम एटलस (BCGA) का जिक्र किया, जिसका उद्देश्य देश में पाए जाने वाले प्रमुख कैंसर प्रकारों के आनुवंशिक पैटर्न को समझना है। फिलहाल यह पहल डेटा संग्रह चरण में है।
उन्होंने बताया कि भारत में कैंसर उपचार दो प्रमुख ढांचों पर आधारित है—एक, निजी अस्पतालों की ओर रेफरल प्रणाली और दूसरा, सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र के तहत प्राथमिक से तृतीयक स्तर तक की उपचार व्यवस्था।
कोलोरेक्टल कैंसर में नई उम्मीद
उन्होंने डोस्टारलिमैब-GXLY (जेम्परली) नामक इम्यूनोथेरेपी दवा का उल्लेख किया, जिसने कोलोरेक्टल कैंसर के एक छोटे समूह में 100% प्रतिक्रिया दिखाई। हालांकि यह प्रगति उत्साहजनक है, लेकिन यह केवल 4–5% मरीजों पर ही प्रभावी है। बाकी मरीजों को अभी भी सर्जरी और कीमोथेरेपी की आवश्यकता पड़ती है।
इम्यूनोथेरेपी और नई रिसर्च
जेम्परली टी-कोशिकाओं पर मौजूद PD-1 प्रोटीन को अवरुद्ध कर इम्यून सिस्टम को कैंसर कोशिकाओं पर हमला करने में मदद करती है। रूस द्वारा घोषित mRNA कैंसर वैक्सीन पर उन्होंने कहा कि फिलहाल इसके समर्थन में कोई प्रकाशित क्लिनिकल डेटा उपलब्ध नहीं है।
अंत में, डॉ. चांडी ने बताया कि भारत में हर वर्ष 10 लाख से अधिक नए कैंसर मामले सामने आते हैं। महिलाओं में ब्रेस्ट, गर्भाशय और अंडाशय कैंसर सबसे ज्यादा आम हैं, जबकि पुरुषों में फेफड़ों, ओरल और प्रोस्टेट कैंसर का प्रकोप अधिक देखा जा रहा है।
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