स्पेस रेस में चीन का बड़ा दांव, रीयूजेबल रॉकेट तकनीक से अमेरिका को चुनौती

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अंतरिक्ष में चीन की बड़ी कामयाबी: पहली बार रीयूजेबल रॉकेट बूस्टर की सफल रिकवरी, स्पेस टेक्नोलॉजी में भरी नई उड़ान

चीन ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार ऑर्बिटल-क्लास रीयूजेबल रॉकेट बूस्टर को सफलतापूर्वक रिकवर किया है। इस सफलता को चीन के स्पेस प्रोग्राम के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि इससे भविष्य में रॉकेट के पहले चरण (First Stage Booster) का दोबारा इस्तेमाल संभव होगा और लॉन्च की लागत कम की जा सकेगी।

शुक्रवार को चीन ने लॉन्ग मार्च-10बी (Long March-10B) कैरियर रॉकेट का सफल प्रक्षेपण किया। मिशन के दौरान रॉकेट ने अपना पेलोड निर्धारित कक्षा में पहुंचाया। इसके बाद पहला चरण मुख्य रॉकेट से अलग होकर नियंत्रित तरीके से वापस लौटा और समुद्र में तैनात रिकवरी प्लेटफॉर्म पर नेट-कैप्चर सिस्टम की मदद से उसे सुरक्षित पकड़ लिया गया।

यह चीन का पहला मिशन है, जिसमें किसी ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट के पहले चरण की सफल रिकवरी की गई। रीयूजेबल रॉकेट तकनीक का मकसद महंगे रॉकेट बूस्टर को दोबारा इस्तेमाल करना है, जिससे अंतरिक्ष मिशनों की लागत और तैयारी का समय दोनों कम हो सकते हैं।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2025 में चीन ने दो अलग-अलग रीयूजेबल रॉकेटों के जरिए ग्रिड फिन और लैंडिंग लेग्स का इस्तेमाल कर वर्टिकल लैंडिंग की कोशिश की थी, लेकिन दोनों परीक्षण असफल रहे थे। ऐसे में मौजूदा मिशन को चीन की अब तक की सबसे बड़ी रिकवरी सफलता माना जा रहा है।

रीयूजेबल रॉकेट तकनीक में सबसे बड़ी सफलता अब तक एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स को मिली थी, जिसने 2015 में पहली बार ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट बूस्टर को सफलतापूर्वक वापस लाकर अंतरिक्ष उद्योग में नई शुरुआत की थी। चीन की ताजा उपलब्धि इस दिशा में उसकी तकनीकी प्रगति को दर्शाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक में सफलता मिलने से चीन भविष्य में अधिक किफायती और तेज़ अंतरिक्ष मिशन संचालित कर सकेगा। साथ ही, वैश्विक स्पेस सेक्टर में प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है, क्योंकि पुन: प्रयोज्य रॉकेट तकनीक को अंतरिक्ष उद्योग का भविष्य माना जाता है।

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