चमोली में विष्णुगाड़-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में गुरुवार शाम भारी मलबा और पानी घुसने से बड़ा हादसा हो गया।
हादसे में नौ श्रमिकों की मौत हो गई, जबकि छह अन्य अब भी सुरंग के भीतर फंसे बताए जा रहे हैं। उन्हें बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। हादसे में घायल 12 श्रमिकों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है। इनमें 10 का उपचार जिला अस्पताल गोपेश्वर, एक का श्रीनगर और एक का पीपलकोटी में किया जा रहा है। एक घायल को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
एनडीआरएफ के असिस्टेंट कमांडेंट आलोक जायरा ने बताया कि बचाव अभियान लगातार जारी रखा जाएगा। सुरंग में पानी और दलदल के साथ ऑक्सीजन की कमी के चलते रात में ऑपरेशन रोकना पड़ा था। शुक्रवार सुबह बचाव दल ने फिर से अभियान शुरू किया।
हादसा 13 अगस्त को शाम करीब पौने सात बजे हुआ। उस वक्त सुरंग के अंदर 25 से ज्यादा श्रमिक काम कर रहे थे। इनमें ज्यादातर बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ के रहने वाले बताए जा रहे हैं।
444 मेगावाट की इस परियोजना का निर्माण टीएचडीसी और एनटीपीसी की ओर से किया जा रहा है और करीब 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है। हादसा 3.5 किलोमीटर लंबी सुरंग के भीतर करीब 1.8 किलोमीटर की दूरी पर हुआ, जहां ग्रेविटी प्वाइंट पर पैकिंग का काम चल रहा था।
प्रत्यक्षदर्शी निस्तरा भिंगरा ने बताया कि काम के दौरान अचानक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी। इसके बाद सुरंग के ऊपरी हिस्से से पानी के साथ भारी मलबा तेजी से अंदर आने लगा। कुछ ही देर में वहां अफरातफरी मच गई और श्रमिक अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे।
भिंगरा के अनुसार, पानी और मलबे के तेज बहाव में वह भी सुरंग के बाहर की ओर बहने लगे और कई बार मलबे में धंस गए। किसी तरह बाहर निकलने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। फिलहाल बचाव दल का मुख्य फोकस सुरंग में फंसे छह श्रमिकों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने पर है।
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