सनातन परंपरा में कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस या धनत्रयोदशी के रूप में मनाया जाता है।
इसी दिन से दीपावली के पंचपर्व की शुभ शुरुआत होती है। यह दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, कुबेर और यमराज की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा और खरीददारी से घर में धन-धान्य और समृद्धि का आगमन होता है।
🌟 धनतेरस 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 18 अक्टूबर 2025, शनिवार को दोपहर 12:18 बजे से शुरू होकर 19 अक्टूबर दोपहर 01:51 बजे तक रहेगी। इसलिए धनतेरस का पर्व 18 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा।
- पूजा का शुभ मुहूर्त: सायं 07:16 से 08:20 बजे तक
- प्रदोष काल: 05:48 से 08:20 बजे तक
- वृषभ काल: 07:16 से 09:11 बजे तक
💰 सोना-चांदी खरीदने का सर्वोत्तम समय
धनतेरस के दिन स्वर्ण व रजत (सोना-चांदी) की खरीददारी के लिए सबसे उत्तम समय प्रातः 08:50 से 10:33 बजे तक (अमृत काल) रहेगा।
शाम का प्रदोष काल और वृषभ काल भी खरीददारी के लिए शुभ माने गए हैं — इन कालों में कोई भी नया सामान, वाहन या बर्तन खरीदना शुभ फल देता है।
🕰️ धनतेरस का चौघड़िया
दिन के चौघड़िया:
- शुभ – 07:49 से 09:15 बजे तक
- चर – 12:06 से 01:32 बजे तक
- लाभ – 01:32 से 02:57 बजे तक
- अमृत – 02:57 से 04:23 बजे तक
रात्रि के चौघड़िया:
- लाभ – 05:48 से 07:23 बजे तक
- शुभ – 08:57 से 10:32 बजे तक
- अमृत – 10:32 से 12:06 बजे तक
- चर – 12:06 से 01:41 बजे तक
🪔 दीपदान का महत्व और विधि
धनतेरस के दिन दीपदान का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन 13 दीये जलाने का विधान है—
- एक दीपक यम देवता के लिए दक्षिण दिशा में,
- एक माता लक्ष्मी के लिए,
- दो दीपक मुख्य द्वार पर,
- एक तुलसी के पौधे के नीचे,
एक छत पर,
और शेष दीपक मंदिर या पवित्र स्थानों पर जलाए जाते हैं।
ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि, धनवृद्धि और सौभाग्य का स्थायी वास होता है। धनतेरस का यह पर्व केवल समृद्धि का प्रतीक ही नहीं, बल्कि सकारात्मकता और कृतज्ञता का उत्सव भी माना जाता है।
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