ट्रंप को नोबेल मेडल देने पर आलोचना तेज, मचाडो के फैसले पर उठे सवाल

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वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो द्वारा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल सौंपे जाने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा हो गया है।

मचाडो ने इसे ट्रंप की वेनेजुएला में लोकतंत्र के समर्थन की भूमिका के सम्मान के रूप में पेश किया, लेकिन नोबेल समिति, नॉर्वे के नेताओं और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। गुरुवार को व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात के दौरान मचाडो ने मेडल सौंपा और कहा कि यह उनके लिए “हमारी आज़ादी के लिए विशेष प्रतिबद्धता” का प्रतीक है। ट्रंप ने इसे आपसी सम्मान का संकेत बताया।

नोबेल समिति ने किया स्पष्ट

नोबेल समिति ने तुरंत स्पष्ट किया कि नोबेल शांति पुरस्कार किसी और को नहीं दिया जा सकता और ट्रांसफर भी नहीं किया जा सकता। नॉर्वेजियन नोबेल इंस्टीट्यूट के अनुसार, पुरस्कार केवल विजेता के नाम पर ही रहता है। मेडल ट्रंप के पास हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह नोबेल विजेता बन गए।

मचाडो को क्यों मिला था नोबेल

मारिया कोरिना मचाडो को 2025 में वेनेजुएला में लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संघर्ष और तानाशाही के खिलाफ आंदोलन के नेतृत्व के लिए नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था। पुरस्कार की घोषणा के समय उन्होंने इसे वेनेजुएला की जनता को समर्पित किया और ट्रंप के समर्थन की भी सराहना की थी।

नॉर्वे में तीखी प्रतिक्रिया

नॉर्वे में इस कदम को “बेहद शर्मनाक” करार दिया गया। नॉर्वे की संसद सदस्य ट्रिग्वे स्लाग्सवोल्ड वेडुम ने कहा कि ट्रंप का मेडल स्वीकार करना यह दिखाता है कि वह दूसरों के काम का श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं। पूर्व नेता और प्रोफेसर यान्ने हालांड माटलारी ने इसे “बेकार और शर्मनाक” कदम बताया। नॉर्वेजियन पीपुल्स एड के महासचिव रेमंड योहानसन ने कहा कि इससे नोबेल शांति पुरस्कार की साख को नुकसान पहुंचता है।

सोशल मीडिया पर बहस

सोशल मीडिया पर भी विवाद छिड़ गया। रूस में अमेरिका के पूर्व राजदूत माइकल मैकफॉल ने लिखा कि ट्रंप को दूसरों का पुरस्कार स्वीकार करते समय शर्म क्यों नहीं आती। कई लोगों ने कहा कि अगर नोबेल पुरस्कार किसी और को सौंपा जा सकता है, तो यह पुरस्कार का मजाक बन जाता है। वहीं कुछ ने मचाडो का बचाव किया और इसे एक प्रतीकात्मक कदम बताया।

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