संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की बुधवार, 7 जनवरी को हुई बैठक में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के जेल में रहने की स्थिति में पद पर बने रहने से जुड़े अहम मुद्दे पर चर्चा हुई। यह 31 सदस्यीय समिति की तीसरी बैठक थी, जिसमें इस विषय से जुड़े तीन विधेयकों की समीक्षा की गई।
करीब तीन घंटे चली बैठक में 130वां संविधान (संशोधन) विधेयक, 2025, जम्मू एवं कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025 पर विचार-विमर्श किया गया।
‘जेल से सरकार चलाना लोकतंत्र के लिए अपमानजनक’
बैठक के बाद JPC अध्यक्ष अपराजिता सारंगी ने कहा कि कुछ राजनीतिक दलों को बैठक में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया था, लेकिन उन्होंने हिस्सा नहीं लिया।
उन्होंने कहा,
“सरकार कानून के दायरे में रहकर शासन करना चाहती है, जबकि कुछ दल कानून से बाहर रहकर सरकार चलाने की सोच रखते हैं। जेल से सरकार चलाना लोकतंत्र के लिए अपमानजनक है।”
विपक्ष की भागीदारी का मुद्दा
बैठक के दौरान विपक्ष के एक सांसद ने मांग रखी कि इन विधेयकों पर चर्चा के लिए विपक्षी दलों को भी सुझाव देने और अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए।
अमित शाह ने किए थे विधेयक पेश
इन तीनों विधेयकों को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अगस्त 2025 में लोकसभा में पेश किया था। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार, यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई केंद्रीय अथवा राज्य मंत्री किसी गंभीर आपराधिक मामले में गिरफ्तार होता है और लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहता है, तो उसे 31वें दिन पद छोड़ना होगा।
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