बंगाल में फर्जी वोटर रजिस्ट्रेशन का खुलासा, जांच के आदेश जारी

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बंगाल में फर्जी मतदाता पंजीकरण का खुलासा, चुनाव आयोग ने जांच के दिए आदेश

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में गंभीर अनियमितताओं का संदेह तब गहराया, जब एक आंतरिक ऑडिट के दौरान चुनाव आयोग के फॉर्म 6 — जो नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए उपयोग होता है — में बड़े पैमाने पर हेराफेरी के संकेत मिले। इस खुलासे के बाद दो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) के खिलाफ जांच के आदेश जारी किए गए हैं।

एनडीटीवी के अनुसार, मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के एक ज्ञापन में बताया गया है कि इन अधिकारियों ने बड़ी संख्या में संदिग्ध आवेदनों को बिना अनिवार्य सत्यापन के स्वीकार किया। नमूना समीक्षा में पाया गया कि जमा हुए हजारों फॉर्मों में से केवल 1% से भी कम की वैध जांच हुई थी। कई मामलों में एक ही दस्तावेज़ को बार-बार इस्तेमाल कर फर्जी पंजीकरण किए गए।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख है कि ईआरओ नेट प्रणाली तक संविदा डेटा एंट्री ऑपरेटरों को अनधिकृत रूप से पहुंच दी गई, जिससे प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

सीईओ कार्यालय ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि पिछले एक साल में भरे गए फॉर्म 6 की समग्र जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की टीमें गठित की जाएं। रिपोर्ट 14 अगस्त तक प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है। साथ ही, संविदा कर्मियों को तत्काल प्रभाव से किसी भी प्रकार की मतदाता सूची संबंधी प्रक्रिया से दूर रखने का निर्देश दिया गया है।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब बिहार में भी मतदाता सूची में बदलाव को लेकर विवाद चल रहा है, जिसकी सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय में हो रही है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इन प्रक्रियात्मक गड़बड़ियों से भाजपा को लाभ पहुंच सकता है।

बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, जहां भाजपा तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कड़ी टक्कर देने की तैयारी कर रही है।

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