एनआईए की जांच में खुलासा हुआ है कि लालकिला के पास 10/11 आत्मघाती हमले से लगभग एक साल पहले, सफेदपोश आतंकियों ने फरीदाबाद के धौज क्रेशर जोन में विस्फोट का ट्रायल किया था।
यह जगह अलफलाह यूनिवर्सिटी के पास है, और आतंकियों ने इसे इसलिए चुना था ताकि मशीनों की तेज आवाज में धमाके की आवाज दब जाए। सीन रिक्रिएशन के दौरान आरोपी डाॅ. मुजम्मिल और डाॅ. शाहीन ने ट्रायल स्थल की निशानदेही की। मौके से क्षतिग्रस्त स्टील पाइप बरामद किया गया, जिसमें अमोनियम नाइट्रेट और अन्य केमिकल मिलाकर विस्फोटक तैयार किया गया था। एनआईए के मुताबिक, विस्फोटक की तीव्रता मापने के लिए ट्रायल किया गया।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि सुरक्षित जगह खोजने में कई दिन लगे। ट्रायल के दिन वे अरावली भ्रमण की आड़ में क्रेशर जोन पहुंचे और स्टील पाइप में विस्फोटक भरकर चट्टान में फंसा कर विस्फोट किया। ट्रायल सफल होने के बाद आरोपी यूनिवर्सिटी कैंपस लौटे और आकाओं को जानकारी दी।
एनआईए ने इस खुलासे के बाद हरियाणा पुलिस और इंटेलिजेंस टीम की लापरवाही पर भी सवाल उठाए हैं। केंद्रीय गृहमंत्रालय ने इसे गंभीर माना है और संबंधित अधिकारियों से जवाबतलब किया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक, आतंकियों ने फरीदाबाद में धमाकों की योजना लंबे समय से बनाई थी, और ट्रायल को अंजाम दिया गया, जबकि सुरक्षा तंत्र सतर्क नहीं था।
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