दिल्ली-NCR में प्रदूषण से लड़ाई तेज, एक्शन प्लान पर 12 महीने नजर

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वायु प्रदूषण से निपटने के लिए अब दिल्ली समेत पूरे एनसीआर में कार्रवाई केवल प्रदूषण बढ़ने के समय तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे रोकने के लिए सालभर लगातार प्रयास किए जाएंगे।

इस दिशा में एनसीआर के सभी राज्यों और शहरी निकायों ने महीनेवार सालाना एक्शन प्लान तैयार कर लिया है, जिसे केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के साथ साझा किया गया है। सबसे अहम बात यह है कि इस योजना के अमल की हर महीने समीक्षा की जाएगी और सभी राज्यों व निकायों ने अपने-अपने स्तर पर काम भी शुरू कर दिया है।

पहली बार बना महीनेवार एक्शन प्लान
वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और सीएक्यूएम के अनुसार, यह पहली बार है जब एनसीआर के सभी राज्य और शहरी निकाय वायु प्रदूषण से निपटने के लिए महीनेवार सालाना योजना लेकर आए हैं। इन योजनाओं में यह स्पष्ट किया गया है कि किस महीने में कौन-से ठोस कदम उठाए जाएंगे।

उदाहरण के तौर पर, दिल्ली सरकार ने जनवरी महीने में अवैध रूप से संचालित उद्योगों और कचरा जलाने के खिलाफ विशेष अभियान शुरू किया है। इसके साथ ही सड़कों पर पानी का छिड़काव और नियमित सफाई जैसे उपाय किए जा रहे हैं, ताकि धूल प्रदूषण को कम किया जा सके।

स्थानीय कारणों के आधार पर राज्यों ने बनाए प्लान
मंत्रालय और सीएक्यूएम से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, एनसीआर के अन्य राज्यों और नगरीय निकायों ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में प्रदूषण के स्थानीय कारणों को ध्यान में रखते हुए रणनीति तैयार की है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने पिछले कुछ हफ्तों में दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के संबंधित अधिकारियों के साथ इन योजनाओं पर अलग-अलग बैठकें भी की हैं।

प्लान के अमल पर रहेगी कड़ी निगरानी
पिछले अनुभवों को देखते हुए इस बार योजना के अमल पर सख्त निगरानी की व्यवस्था की गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारियों को मिलाकर 40 निरीक्षण टीमें गठित की गई हैं, जो सप्ताह में एक से दो दिन राज्यों और निकायों का दौरा कर प्लान के क्रियान्वयन की जांच करेंगी।

इसके अलावा, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को भी 25 अतिरिक्त टीमें बनाने के निर्देश दिए गए हैं, जो सीएक्यूएम द्वारा चिन्हित स्थलों की निगरानी करेंगी। निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों को यदि दोबारा भी अनदेखा किया गया, तो संबंधित एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

‘यह प्लान नहीं, बल्कि वादा है’
सीएक्यूएम के सचिव तरुण पिथोड़े ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह सिर्फ एक प्लान नहीं, बल्कि राज्यों और नगरीय निकायों की प्रतिबद्धता है। उन्होंने कहा कि राज्यों ने यह वादा किया है कि वे तय समय पर तय कदम उठाएंगे और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि कहीं कोई व्यावहारिक दिक्कत आती है, तो उसका समाधान निकाला जाएगा, लेकिन जिम्मेदारी से बचने की अनुमति नहीं होगी।

वाहन प्रदूषण पर अंकुश के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर जोर
एनसीआर में वायु प्रदूषण का बड़ा कारण वाहनों से निकलने वाला धुआं है। इसे देखते हुए मंत्रालय और सीएक्यूएम ने सभी राज्यों और शहरी निकायों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को मजबूत करने के लिए अलग से योजना तैयार करने को कहा है।

इस योजना में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार, नए मेट्रो स्टेशन बनाने, बसों की संख्या में करीब तीन गुना बढ़ोतरी, ई-वाहनों को बढ़ावा देने और चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाने जैसे उपाय शामिल होंगे। दिल्ली मेट्रो की एक अध्ययन रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया है कि मेट्रो विस्तार के चलते एनसीआर में करीब चार लाख निजी वाहन सड़कों से कम हुए हैं।

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