केंद्रीय बजट 2026-27 पर लोकसभा में चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि सरकार का मुख्य फोकस एमएसएमई, इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्किल डेवलपमेंट और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने पर है। उन्होंने कहा कि यह बजट रोजगार सृजन, छोटे उद्योगों को मजबूती और देश की बुनियादी ढांचा क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
MSME को प्राथमिकता
वित्त मंत्री ने कहा कि एमएसएमई सेक्टर बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करता है, इसलिए इसे विशेष प्राथमिकता दी गई है। छोटे और मध्यम उद्योगों को नीतिगत समर्थन, आसान ऋण सुविधा और विस्तार के नए अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। क्रेडिट सपोर्ट बढ़ाने का भी प्रावधान किया गया है ताकि व्यवसायों को पूंजी की कमी न हो।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स पर जोर
उन्होंने बताया कि सड़क, जलमार्ग और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को सुदृढ़ किया जाएगा। बेहतर परिवहन व्यवस्था से ढुलाई लागत घटेगी और उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी। सरकार का मानना है कि मजबूत बुनियादी ढांचा आर्थिक विकास की गति को तेज करेगा।
स्किल डेवलपमेंट और रोजगार
स्किल डेवलपमेंट इस बजट का प्रमुख स्तंभ है। युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण देने की योजना है ताकि उन्हें सीधे रोजगार मिल सके। मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पांच क्षेत्रीय मेडिकल हब स्थापित किए जाएंगे, जिससे करीब 1 लाख रोजगार सृजित होने का अनुमान है। साथ ही 1.5 लाख केयरगिवर्स को प्रशिक्षित किया जाएगा।
स्वास्थ्य और आयुष पर फोकस
सरकार भारत को हेल्थ टूरिज्म हब बनाने की दिशा में काम कर रही है। आयुष पद्धति को भी इसमें शामिल किया जाएगा, जिससे मेडिकल एजुकेशन और स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा।
फिशरीज और पशुपालन को प्रोत्साहन
वित्त मंत्री ने कहा कि मत्स्य पालन और पशुपालन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए विशेष पहल की जा रही है, जिससे किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा।
राज्यों को 17.1 लाख करोड़ रुपये
सीतारमण ने बताया कि इस बार राज्यों को 17.1 लाख करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाएगा, जो पहले की तुलना में अधिक है। उन्होंने कहा कि वित्त आयोग ने भी पुष्टि की है कि केंद्र से राज्यों को मिलने वाला फंड पारदर्शी तरीके से हस्तांतरित किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान के तहत केंद्र को सेस और सरचार्ज लगाने का अधिकार है। सेस से प्राप्त राशि राज्यों में ही विकास कार्यों—जैसे सड़क, स्कूल और अस्पताल—पर खर्च होती है।
मखाना बोर्ड का बजट बढ़ा
वित्त मंत्री ने कहा कि मखाना बोर्ड के लिए पिछले वर्ष 30 करोड़ रुपये का प्रावधान था, जिसे बढ़ाकर 90 करोड़ रुपये कर दिया गया है। बिहार सरकार ने बोर्ड के लिए जमीन भी आवंटित कर दी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मखाना किसानों को किसी प्रकार की किल्लत नहीं होने दी जाएगी।
कृषि में तकनीक का इस्तेमाल
कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग, बीज परीक्षण सुविधाओं के विस्तार और किसानों के प्रशिक्षण पर जोर दिया जा रहा है। उर्वरक और यूरिया के लिए पर्याप्त बजट प्रावधान किए गए हैं। विपक्ष द्वारा कमी के दावों को वित्त मंत्री ने खारिज करते हुए कहा कि किसानों को हरसंभव सहायता दी जा रही है।
वित्त मंत्री ने दोहराया कि सरकार का लक्ष्य समावेशी विकास सुनिश्चित करना और अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र को सशक्त बनाना है।
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