यमन में पूर्व राष्ट्रपति के बेटे को सुनाई गई सज़ा-ए-मौत

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देशद्रोह और जासूसी के आरोप में यमन के पूर्व राष्ट्रपति के बेटे अहमद सालेह को मौत की सजा

हूती नियंत्रित यमन की राजधानी सना में एक सैन्य अदालत ने देश के पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के बेटे ब्रिगेडियर जनरल अहमद अली अब्दुल्ला सालेह को देशद्रोह, जासूसी और भ्रष्टाचार का दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने उनकी संपत्तियों को ज़ब्त करने और गबन की गई रकम की वसूली का आदेश भी दिया है।

हूती संचालित समाचार एजेंसी ‘सबा’ के मुताबिक, सना की केंद्रीय सैन्य अदालत ने अहमद सालेह को “दुश्मन के साथ मिलीभगत” और पूर्व सार्वजनिक पद के दुरुपयोग के आरोपों में यह सजा दी है।

कौन हैं अहमद अली सालेह?
अहमद सालेह, यमन के पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के सबसे बड़े बेटे हैं। उन्होंने यमन की शक्तिशाली रिपब्लिकन गार्ड का नेतृत्व किया था, जिसमें करीब 80,000 सैनिक थे। 2013 से 2015 तक वे UAE में यमन के राजदूत भी रहे। वे लंबे समय से अबू धाबी में निर्वासित जीवन बिता रहे हैं और राजनीतिक रूप से निष्क्रिय हैं। हालांकि, वे अब भी सत्तारूढ़ जनरल पीपुल्स कांग्रेस पार्टी में प्रभावशाली माने जाते हैं।

उत्तराधिकारी की तैयारी, लेकिन सत्ता से बाहर
अहमद सालेह को कभी अपने पिता के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता था। 2004 में ब्रिगेडियर जनरल बने और रिपब्लिकन गार्ड की कमान संभाली। लेकिन 2011 में अरब स्प्रिंग के दौरान जब उनके पिता को सत्ता से हटना पड़ा, तब उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं भी धराशायी हो गईं।

रियाद समझौते के तहत उन्हें और उनके पिता को अभियोजन से छूट मिली थी, लेकिन उन्होंने सेना और पार्टी में अपनी पकड़ बनाए रखी।

हूतियों से गठबंधन और अंत में टकराव
2014 में हूतियों ने जब सना पर कब्जा किया, तब अहमद की सेना ने उन्हें समर्थन दिया। लेकिन 2017 में जब अली अब्दुल्ला सालेह ने हूतियों से अलग होने की कोशिश की, तो उनका कत्ल कर दिया गया। इसके बाद से अहमद निर्वासन में हैं और संयुक्त राष्ट्र व यूरोपीय संघ द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का सामना कर चुके हैं। हाल ही में जुलाई 2024 में UN और अगस्त में EU ने उनके प्रतिबंध हटा लिए थे।

अब हूती अदालत का यह ताजा फैसला उनके लिए एक और बड़ा झटका साबित हो सकता है — खासकर ऐसे समय में जब कुछ विश्लेषक उनके संभावित राजनीतिक पुनरागमन की अटकलें लगा रहे थे।

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