धरती से दूर होता चंद्रमा, बढ़ेंगे भविष्य में दिन के घंटे
पृथ्वी का सबसे भरोसेमंद खगोलीय साथी चंद्रमा धीरे-धीरे हमसे दूर होता जा रहा है। मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह हर साल करीब 1.5 इंच (3.8 सेमी) दूर खिसक रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ज्वार-भाटों के असर से यह प्रक्रिया जारी है। चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण महासागरों में उभार पैदा करता है। पृथ्वी के घूमने के कारण ये उभार चंद्रमा को थोड़ा आगे खींचते हैं, जिससे उसकी कक्षा बड़ी होती जाती है और वह पृथ्वी से दूर जाता रहता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि करोड़ों साल पहले चंद्रमा पृथ्वी के बेहद करीब था और उस समय दिन भी छोटे हुआ करते थे। जीवाश्म रिकॉर्ड बताते हैं कि लगभग 70 करोड़ साल पहले पृथ्वी का एक दिन सिर्फ 23.5 घंटे का था।
आज चंद्रमा औसतन 3,84,000 किमी दूर है। हालांकि इसकी दूरी साल दर साल थोड़ी बढ़ रही है, लेकिन यह दर बेहद धीमी है। इसका असर यह होगा कि आने वाले लाखों सालों में दिन धीरे-धीरे लंबे होते जाएंगे—सेकंड, मिनट और फिर घंटों तक का इज़ाफा होगा।
वैज्ञानिक लेजर तकनीक से इस दूरी को मापते हैं। चंद्रमा पर पहले के अंतरिक्ष मिशनों द्वारा लगाए गए विशेष दर्पणों से लेजर बीम को टकराकर लौटने में लगने वाला समय रिकॉर्ड किया जाता है, जिससे यह बदलाव बेहद सटीकता से मापा जा सकता है।
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