हांगकांग ब्लेज़ हॉरर: 94 की मौत, 3,900 से ज्यादा लोग अब भी इमारतों में फंसे

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हांगकांग अग्निकांड: 8 में से 7 टावर आग की चपेट में, जांच तेज़ — निर्माण कंपनी पर गिरफ्तारी की गाज

हांगकांग के वांग फुक कोर्ट परिसर में लगे बांस के मचान में आग लगने के बाद आठ 32-मंज़िला इमारतों में से सात को भीषण आग ने अपनी चपेट में ले लिया। अधिकारियों के मुताबिक, तेज़ गर्मी और धुएं ने बचाव कार्य को बेहद मुश्किल बना दिया। यह हादसा 1996 की कॉव्लून आग से भी ज़्यादा घातक साबित हुआ, जिसमें 41 लोगों की मौत हुई थी। ऐतिहासिक रूप से, 1948 के एक गोदाम हादसे में 176 लोग मारे गए थे।

आग कैसे लगी—मचान, जाल और सामग्री पर शक

अधिकारियों ने बताया कि ऊँची इमारतों के बाहरी नवीनीकरण में इस्तेमाल की गई सामग्री—जैसे प्लास्टिक फोम पैनल, जाल और बांस का मचान—संभवतः आग पकड़ने वाली थी और सुरक्षा मानकों पर खरी नहीं उतरती थी। तेज़ हवाओं ने आग को टावरों में फैलने में मदद की।

जांच के तहत एक निर्माण कंपनी के दो निदेशकों और एक इंजीनियरिंग सलाहकार को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने कंपनी का नाम आधिकारिक रूप से नहीं बताया, लेकिन प्रेस्टीज कंस्ट्रक्शन एंड इंजीनियरिंग कंपनी के कार्यालय की तलाशी की पुष्टि हुई है।

पुरानी इमारतें, न स्मोक डिटेक्टर न स्प्रिंकलर

1980 के दशक में बने वांग फुक कोर्ट के अपार्टमेंट 40–45 वर्ग मीटर के साधारण फ्लैट हैं, जिनमें स्मोक डिटेक्टर और स्प्रिंकलर सिस्टम नहीं लगे। ये इमारतें हांगकांग की अग्नि संहिता में हुए संशोधनों से पहले बनी थीं, इसलिए इनमें अनिवार्य अग्नि सुरक्षा मंज़िलें भी नहीं हैं।
हांगकांग के 75 लाख लोग बेहद तंग और ऊँची इमारतों में रहते हैं, जो एक-दूसरे से सटी होती हैं—ऐसी संरचनाएँ आग के वक्त खतरा और बढ़ा देती हैं।

फायर ब्रिगेड की चुनौतियाँ—20वीं मंज़िल से ऊपर पहुंचना मुश्किल

अग्निशमनकर्मियों को आग पर काबू पाने में भारी दिक्कत आई। उनकी सीढ़ियाँ और नल 32-मंज़िला इमारतों की आधी ऊँचाई (करीब 53 मीटर) तक ही पहुँच पा रहे थे।
तेज़ हवाएँ और अत्यधिक गर्मी हेलीकॉप्टर समेत किसी भी हवाई बचाव उपकरण के लिए ख़तरनाक साबित हुईं। उच्च तापमान के कारण फायरफाइटर्स ऊपरी मंज़िलों में प्रवेश तक नहीं कर पाए।

सरकार की बड़ी कार्रवाई—टास्क फोर्स, सुरक्षा की समीक्षा

हांगकांग के मुख्य कार्यकारी जॉन ली ने इस त्रासदी की विस्तृत जांच के लिए टास्क फोर्स के गठन का ऐलान किया। मामला कोरोनर कोर्ट में भी भेजा जाएगा, जहाँ मौतों के कारण और परिस्थितियों की जांच की जाएगी।
सरकार ने सभी पुराने और मरम्मताधीन आवासीय परिसरों में मचान व निर्माण सामग्री की सुरक्षा की समीक्षा का आदेश दिया है। प्रभावित परिवारों को “हरसंभव सहायता” देने का वादा भी किया गया।

बचे लोगों के लिए राहत—स्कूलों में अस्थायी शेल्टर

इमारतों से निकाले गए और बाहर मौजूद सैकड़ों लोग नजदीकी स्कूलों व सामुदायिक केंद्रों में शरण लिए हुए हैं। आम लोग पानी, खाना और ज़रूरी सामान दे रहे हैं, जबकि स्वयंसेवक लगातार राहत सामग्री पहुँचा रहे हैं।
अग्निशमन विभाग के अनुसार 70 से अधिक लोग घायल हैं।

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