DK शिवकुमार कितने प्रभावशाली? 1,400 करोड़ की संपत्ति और कर्नाटक में उनकी राजनीतिक ताकत

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कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच खींचतान तेज़ हो गई है।

2023 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले की चर्चा चलती रही, लेकिन 79 वर्षीय सिद्धारमैया फिलहाल पद छोड़ने के मूड में नहीं हैं। वहीं डीके शिवकुमार भी अपनी दावेदारी मज़बूती से पेश कर रहे हैं। देश के सबसे अमीर नेताओं में गिने जाने वाले और कांग्रेस के ‘संकटमोचक’ माने जाने वाले डीके की राजनीतिक यात्रा हमेशा सुर्खियों में रही है।

कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष और डिप्टी सीएम

डीके शिवकुमार राज्य सरकार में उपमुख्यमंत्री हैं और जल संसाधन व शहरी विकास जैसे अहम मंत्रालय संभालते हैं। 2020 से वे कर्नाटक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। उनकी पदयात्राओं और राज्यव्यापी अभियानों ने 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ी जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

1400 करोड़ की संपत्ति

एडीआर रिपोर्ट के अनुसार, कनकपुरा सीट से विधायक डीके शिवकुमार की घोषित संपत्ति करीब ₹1,413 करोड़ है, जिससे वे देश के सबसे अमीर विधायकों में शामिल हैं। तुलना में, CM सिद्धारमैया की कुल संपत्ति लगभग ₹52 करोड़ बताई जाती है।
2023 के हलफनामे में डीके शिवकुमार के पास 100 करोड़ की कृषि/गैर-कृषि जमीन, 942 करोड़ की रिसॉर्ट-फार्महाउस व कमर्शियल प्रॉपर्टी और 84 करोड़ का बेंगलुरु बंगला दर्ज है।

27 साल की उम्र में बने थे पहली बार विधायक

15 मई 1962 को बेंगलुरु के एक संपन्न वोक्कालिगा परिवार में जन्मे डीके शिवकुमार ने छात्र राजनीति से शुरुआत की और 1989 में मात्र 27 साल की उम्र में पहली बार विधायक बने। तब से वे लगातार आठ बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। उनके भाई डीके सुरेश भी राजनीति में सक्रिय हैं।

कारोबार से भी मजबूत पकड़

राजनीति के साथ-साथ डीके रियल एस्टेट, ग्रेनाइट और शिक्षा क्षेत्र के व्यवसायों से जुड़े हैं। टिकट न मिलने पर उन्होंने कभी देवेगौड़ा और फिर कुमारस्वामी को हराकर अपनी राजनीतिक ताकत साबित की। छात्र जीवन में 12वीं पास करने के बाद उन्होंने राजनीतिक विज्ञान में एमए किया और संस्कृत में भी अच्छी पकड़ रखते हैं।

कांग्रेस के ‘संकटमोचक’

डीके शिवकुमार कई बार कांग्रेस के लिए संकटमोचक साबित हुए हैं।

2002 में महाराष्ट्र की विलासराव देशमुख सरकार को बचाने के लिए कांग्रेस विधायक उनके बेंगलुरु फॉर्महाउस में ठहराए गए।

2017 में गुजरात राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के 42 विधायकों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी उन्होंने ही निभाई, जिससे अहमद पटेल की जीत सुनिश्चित हुई।

कांग्रेस–जेडीएस गठबंधन के सूत्रधार

2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद जब त्रिशंकु स्थिति बनी, तब कांग्रेस और जेडीएस को साथ लाने में डीके की अहम भूमिका रही। उन्हें गांधी परिवार का भरोसेमंद नेता माना जाता है।

कानूनी लड़ाई जारी

डीके शिवकुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला चल रहा है, जिसे वे राजनीतिक साजिश बताते हैं और इसके खिलाफ कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे हैं।

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