महाराष्ट्र की पोषण योजनाओं का असर, गंभीर कुपोषित बच्चों की संख्या में भारी गिरावट

3

महाराष्ट्र में कुपोषण पर नियंत्रण: गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की संख्या में आई 68% गिरावट

महाराष्ट्र में कुपोषण के खिलाफ चलाए जा रहे राज्य सरकार के अभियान अब असर दिखा रहे हैं। पिछले दो वर्षों में राज्य में गंभीर और मध्यम कुपोषित बच्चों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट आई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की दर 1.93% से घटकर 0.61% रह गई है। इसी अवधि में मध्यम रूप से कुपोषित बच्चों की संख्या भी 5.9% से घटकर 3.11% हो गई है।

राज्य सरकार का कहना है कि यह उपलब्धि विभिन्न विभागों और एजेंसियों के आपसी समन्वय, निगरानी और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस सफलता को “साझा प्रयास की जीत” बताया और मैदानी स्तर पर कार्यरत अधिकारियों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सराहना की।

आंकड़ों में दिखा सुधार
सालाना सर्वेक्षण के अनुसार:

  • मार्च 2023: 80,248 बच्चे (1.93%) गंभीर रूप से कुपोषित
  • मार्च 2024: 51,475 बच्चे (1.21%)
  • मार्च 2025: 29,107 बच्चे (0.61%)

मध्यम रूप से कुपोषित बच्चों की संख्या भी 2.12 लाख से घटकर 1.49 लाख हो गई है।

इस दौरान 2023 में 41.67 लाख, 2024 में 42.62 लाख और 2025 में 48.10 लाख बच्चों का वजन और कद रिकॉर्ड किया गया।

प्रमुख योजनाएं और पहल
राज्य में कुपोषण के खिलाफ कई योजनाएं प्रभावी रूप से लागू की गई हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

एकीकृत बाल विकास सेवा योजना (ICDS): 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को पूरक पोषण

6 माह से 3 वर्ष: घर पर पूरक आहार (THR)

3 से 6 वर्ष: आंगनवाड़ी केंद्रों में गर्म ताजा भोजन (HCM)

आदिवासी परियोजनाओं में ‘डॉ. कलाम अमृत आहार योजना’ के तहत महिलाओं को एक समय का भोजन, और बच्चों को अंडा व केला दिया जा रहा है।

गंभीर कुपोषित बच्चों के लिए ग्राम एवं शहरी बाल विकास केंद्र खोले गए हैं, जहां तीन बार पोषक आहार और स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं।

डिजिटल निगरानी और समीक्षा प्रणाली
राज्य ने तकनीक का भी भरपूर उपयोग किया है:

‘नर्चर एप’ के जरिए गंभीर कुपोषित बच्चों पर व्यक्तिगत निगरानी

‘पोषण ट्रैकर’ से बच्चों की लंबाई और वजन की नियमित रिकॉर्डिंग

साप्ताहिक समीक्षा बैठकें और मैदानी अधिकारियों का प्रशिक्षण सुनिश्चित किया गया है।

सरकार का लक्ष्य न केवल कुपोषण की दर को और कम करना है, बल्कि इसे पूर्णतः समाप्त करने की दिशा में ठोस कदम उठाना भी है।

Comments are closed.