मिडिल ईस्ट जंग का असर: तेल संकट से जूझते बांग्लादेश को भारत ने भेजा डीजल

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मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित होने से बांग्लादेश में ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है।

ऐसे समय में भारत ने पड़ोसी देश की मदद के लिए आगे आते हुए डीजल की एक बड़ी खेप भेजी है। सूत्रों के मुताबिक, नई दिल्ली ने दोनों देशों के बीच चल रहे नियमित ऊर्जा व्यापार के तहत बांग्लादेश को 5,000 टन डीजल की आपूर्ति की है। ईरान से जुड़े संघर्ष के बाद क्षेत्रीय तेल आपूर्ति में आई रुकावट के कारण बांग्लादेश में पेट्रोल और डीजल की कमी की स्थिति बन गई है। इस बीच बांग्लादेश की नई सरकार ने भारत से डीजल की खेप मिलने की पुष्टि की है और अतिरिक्त आपूर्ति का अनुरोध भी किया है।

बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (बीपीसी) के अध्यक्ष Muhammad Rezanur Rahman ने समाचार एजेंसी ANI को बताया कि भारत के साथ हुए समझौते के तहत हर साल पाइपलाइन के माध्यम से 1,80,000 टन डीजल की आपूर्ति की जानी है। उन्होंने कहा कि हाल ही में आई 5,000 टन की खेप उसी समझौते का हिस्सा है।

उन्होंने बताया कि समझौते के अनुसार छह महीने के भीतर कम से कम 90,000 टन डीजल का आयात किया जाना चाहिए। मौजूदा खेप उसी लक्ष्य की दिशा में एक कदम है और उम्मीद है कि अगले दो महीनों में निर्धारित मात्रा की आपूर्ति पूरी कर ली जाएगी।

मैत्री पाइपलाइन के जरिए आपूर्ति

भारत बांग्लादेश को डीजल की आपूर्ति India–Bangladesh Friendship Pipeline के जरिए कर रहा है। इस परियोजना के तहत असम स्थित Numaligarh Refinery Limited से वाणिज्यिक आधार पर तेल भेजा जाता है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, ढाका की ओर से अतिरिक्त आपूर्ति के लिए जो अनुरोध किया गया है, उस पर ईंधन की उपलब्धता और अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए निर्णय लिया जाएगा।

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है, हालांकि भारत सरकार का कहना है कि देश के भीतर फिलहाल तेल या गैस की कमी की स्थिति नहीं है।

उधर ऊर्जा संकट से जूझ रहे बांग्लादेश ने हालात से निपटने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं। सरकार ने कुछ सार्वजनिक और निजी विश्वविद्यालयों को अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला किया है। साथ ही ईंधन स्टेशनों पर घबराहट में हो रही खरीदारी को नियंत्रित करने के लिए पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर दैनिक सीमा भी लागू कर दी गई है।

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