पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच रणनीतिक रूप से अहम Strait of Hormuz को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है।
Iran ने तनाव कम करने और समुद्री मार्ग को सुचारु करने के लिए United States को 14 सूत्रीय प्रस्ताव भेजा है, जिसमें 30 दिनों के भीतर समाधान की समयसीमा तय करने की बात कही गई है।
ईरानी मीडिया के अनुसार, यह प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए वॉशिंगटन तक पहुंचाया गया। इसमें लेबनान सहित विभिन्न मोर्चों पर संघर्ष खत्म करने और स्थायी शांति की दिशा में ठोस कदम उठाने का आग्रह किया गया है। जहां अमेरिका सीमित अवधि के युद्धविराम की बात कर रहा है, वहीं ईरान दीर्घकालिक समाधान पर जोर दे रहा है।
प्रस्ताव और मतभेद
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका की नौ-सूत्रीय योजना के जवाब में कई प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंका खत्म करना, क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य मौजूदगी में कमी, फ्रीज संपत्तियों की रिहाई और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत शामिल हैं। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही के लिए नए तंत्र का सुझाव भी दिया गया है।
दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा मतभेद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बना हुआ है। अमेरिका पहले ठोस आश्वासन चाहता है, जबकि ईरान प्रतिबंधों में राहत को प्राथमिकता दे रहा है।
अमेरिका की प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया है कि शुरुआती तौर पर वह इस प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव की समीक्षा की जाएगी, लेकिन इसे स्वीकार करना आसान नहीं होगा। साथ ही चेतावनी दी कि अगर ईरान का रुख आक्रामक रहा, तो सैन्य विकल्प अब भी खुले हैं।
क्षेत्रीय हालात नाजुक
इस बीच Israel और लेबनान के बीच संघर्ष विराम की स्थिति भी अस्थिर बनी हुई है। इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में लोगों को सुरक्षित दूरी बनाने की सलाह दी है।
ईरान का सख्त रुख
ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह होर्मुज को लेकर युद्ध-पूर्व स्थिति में लौटने को तैयार नहीं है। देश के वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि जलडमरूमध्य पर उसका नियंत्रण बना रहेगा और नए नियमों के तहत ही आवाजाही संभव होगी।
‘समुद्री डकैती’ बयान पर विवाद
ईरान ने Donald Trump के उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने ईरानी जहाजों की जब्ती को “समुद्री डकैती” जैसा बताया था। ईरान के विदेश मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का उल्लंघन करार दिया और संयुक्त राष्ट्र से इस पर संज्ञान लेने की मांग की है।
परमाणु मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय दबाव
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने ओमान और Italy के अपने समकक्षों से बातचीत की। इटली ने साफ किया है कि ईरान का सैन्य परमाणु कार्यक्रम उसके लिए ‘रेड लाइन’ है और इससे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है।
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