ईरान फिर करेगा परमाणु वार्ता, 25 जुलाई को E3 देशों से होगी बातचीत – अमेरिका बाहर

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परमाणु समझौते पर फिर तैयार ईरान, 25 जुलाई को फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन से होगी अहम बातचीत

ईरान ने एक बार फिर अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर वार्ता की मेज़ पर लौटने का फैसला किया है। लेकिन इस बार वह अमेरिका के साथ नहीं, बल्कि यूरोप की तीन प्रमुख शक्तियों—फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन (E3) के साथ 25 जुलाई को इस्तांबुल में वार्ता करेगा। यह घोषणा ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माईल बाघाई ने की है।

E3 की चेतावनी के बाद बढ़ी कूटनीतिक हलचल
E3 देशों ने हाल ही में ईरान को चेतावनी दी थी कि यदि वह बातचीत फिर से शुरू नहीं करता, तो उस पर फिर से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इस चेतावनी के बाद ईरान ने उप विदेश मंत्री स्तर की वार्ता पर सहमति दी है। माना जा रहा है कि इन वार्ताओं में 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) को पुनर्जीवित करने की दिशा में बातचीत होगी।

वार्ता शुक्रवार, 25 जुलाई को होगी. इससे पहले E3 देशों के विदेश मंत्रियों के साथ-साथ यूरोपीय संघ के विदेश नीति प्रमुख ने गुरुवार को ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ ईरान-इजरायल-अमेरिका जंग के बाद पहली बार बातचीत की थी. इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने एक महीने पहले ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया था.

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर
गौरतलब है कि हाल ही में ईरान ने अमेरिका पर इजरायली सैन्य हमलों में शामिल होने का गंभीर आरोप लगाया था। इन हमलों में ईरान के कई शीर्ष सैन्य अधिकारी, परमाणु वैज्ञानिक और आम नागरिक मारे गए थे। इसके जवाब में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव इतना बढ़ा कि अमेरिका ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु स्थलों पर हमला कर उन्हें “नष्ट” करने का दावा भी किया। यह संघर्ष 24 जून को संघर्षविराम के बाद थमा।

ओमान की मध्यस्थता से भी बनी नहीं बात
इससे पहले ईरान और अमेरिका के बीच ओमान की मध्यस्थता में पांच दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन यूरेनियम संवर्धन जैसे मुख्य मुद्दों पर मतभेद बने रहे। पश्चिमी देश चाहते हैं कि ईरान यूरेनियम संवर्धन को शून्य स्तर तक लाए ताकि परमाणु हथियार निर्माण की संभावना खत्म हो सके।

2015 के समझौते की पृष्ठभूमि
2015 में हुए परमाणु समझौते में अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, चीन और रूस शामिल थे। इस समझौते के तहत ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने की शर्तों पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से राहत दी गई थी। हालांकि, 2018 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते से एकतरफा बाहर निकलने का फैसला किया, जिसके बाद तनाव एक बार फिर बढ़ गया।

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