क्या बच्चों को लती बना रहा Instagram? कोर्ट में मेटा CEO से कड़े सवाल

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अमेरिका के Los Angeles में चल रही एक अहम सुनवाई में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए।

इस मामले में Meta के CEO Mark Zuckerberg से अदालत में तीखी जिरह की गई। सुनवाई का केंद्र यह है कि क्या सोशल मीडिया कंपनियों ने अपने प्लेटफॉर्म इस तरह डिजाइन किए हैं, जिससे बच्चे और किशोर अत्यधिक इस्तेमाल की ओर आकर्षित हों और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़े।

सुनवाई में क्या उठे सवाल?

वादी पक्ष ने आरोप लगाया कि Instagram और Facebook जैसे प्लेटफॉर्म कम उम्र के यूजर्स को लंबे समय तक जोड़े रखने के लिए बनाए गए। अदालत में पेश दस्तावेजों के मुताबिक, पहले भी बड़ी संख्या में 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के प्लेटफॉर्म पर सक्रिय होने की जानकारी सामने आई थी।

वकीलों ने सवाल उठाया कि क्या कंपनी छोटे बच्चों से नियमों की बारीक शर्तें पढ़कर सही उम्र दर्ज करने की उम्मीद कर सकती है। एज वेरिफिकेशन (आयु सत्यापन) को लेकर भी अदालत में लगातार पूछताछ हुई।

जुकरबर्ग का जवाब

मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि कंपनी ने कम उम्र के यूजर्स की पहचान करने की तकनीक में सुधार किया है। उनके अनुसार, कई यूजर्स अकाउंट बनाते समय अपनी उम्र गलत दर्ज कर देते हैं, जिससे निगरानी चुनौतीपूर्ण हो जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी समय के साथ नए टूल्स और प्रक्रियाएं जोड़ रही है ताकि आयु सत्यापन को और प्रभावी बनाया जा सके।

बता दें कि जुकरबर्ग इस मुकदमे में वो गवाह थे जिनपर सबसे अधिक नजर थी. यह उन अदालती केसों की श्रृंखला में पहला ऐसा केस है जो अमेरिकी परिवारों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के खिलाफ दायर किए गए हजारों मुकदमों के लिए कानूनी मिसाल कायम कर सकता था. इस सुनवाई में पहली बार यह देखा गया कि अरबपति मालिक ने सीधे जूरी के सामने और शपथ लेकर अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर मौजूद सुरक्षा उपायों की जानकारी दी, उनका बचाव किया.

मुकदमे की पृष्ठभूमि

यह मुकदमा मार्च के अंत तक चल सकता है। जूरी को तय करना है कि क्या मेटा और YouTube जैसे प्लेटफॉर्म एक कैलिफ़ोर्निया निवासी के मानसिक स्वास्थ्य संकट के लिए जिम्मेदार हैं। वादी का दावा है कि उसने बहुत कम उम्र से सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग किया और अब गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रही है।

आगे क्या?

यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक रूप से टेक कंपनियों की जिम्मेदारी और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़ा है। अदालत का फैसला भविष्य में सोशल मीडिया कंपनियों के नियमन और आयु सत्यापन से जुड़ी नीतियों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

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