लोकप्रियता के सहारे चुनावी दांव, जीत की कोशिश में पीएम सनाय ताकाइची
जापान की प्रधानमंत्री सनाय ताकाइची रविवार को हुए अचानक चुनाव में अपनी ऊंची लोकप्रियता का फायदा उठाकर सत्ता पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं। चीन के साथ बढ़ते तनाव और अमेरिका की अनिश्चित विदेश नीति के बीच ताकाइची देश की अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने के एजेंडे पर चुनावी मैदान में उतरी हैं।
बिखरा विपक्ष, एलडीपी को बढ़त
अति-रूढ़िवादी छवि वाली ताकाइची ने अक्टूबर में जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में पद संभाला था। तब से उनकी लोकप्रियता लगातार बनी हुई है। उनकी कार्यशैली और “काम, काम, काम” का नारा खासतौर पर युवा मतदाताओं के बीच असरदार साबित हुआ है। ताजा सर्वेक्षणों के मुताबिक, ताकाइची की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) निचले सदन में बड़ी जीत की ओर बढ़ रही है। भले ही नए मध्यमार्गी गठबंधन बने हों और दक्षिणपंथी दलों का असर बढ़ा हो, लेकिन विपक्ष की बिखरी स्थिति उसे ताकाइची के लिए गंभीर चुनौती बनने से रोक रही है।
बहुमत को लेकर आश्वस्त
ताकाइची को भरोसा है कि उनकी एलडीपी पार्टी अपने नए सहयोगी जापान इनोवेशन पार्टी (JIP) के साथ मिलकर संसद के शक्तिशाली निचले सदन की 465 सीटों में बहुमत हासिल कर लेगी।
कुछ प्रमुख जापानी अखबारों के सर्वे बताते हैं कि एलडीपी अकेले भी साधारण बहुमत हासिल कर सकती है, जबकि गठबंधन को करीब 300 सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है। यह 2024 के चुनाव में मिली सीमित बढ़त के मुकाबले बड़ी छलांग मानी जा रही है।
हालांकि, गठबंधन के पास अभी भी संसद के उच्च सदन में बहुमत नहीं है, जिससे कानून पारित कराने के लिए विपक्ष पर निर्भरता बनी रहेगी—और यही राजनीतिक अस्थिरता का जोखिम भी है।
हार हुई तो पद छोड़ने का ऐलान
ताकाइची ने साफ कहा है कि यह चुनाव इस बात का फैसला करेगा कि वह प्रधानमंत्री बनी रहें या नहीं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर एलडीपी बहुमत हासिल करने में विफल रहती है तो वह पद छोड़ देंगी।
यदि ताकाइची का गठबंधन, खासकर दक्षिणपंथी सहयोगी जेआईपी के साथ, बड़ी जीत दर्ज करता है तो जापान की सुरक्षा, आव्रजन और घरेलू नीतियों में बड़ा दक्षिणपंथी झुकाव देखने को मिल सकता है। इसी बीच, धुर दक्षिणपंथी और लोकलुभावन दल—जैसे राष्ट्रवादी पार्टी संसेतो—भी अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं।
विपक्ष के वादे, लेकिन असर सीमित
बौद्ध समर्थित शांतिवादी कोमेइतो पार्टी, जो ताकाइची की नीतियों और भ्रष्टाचार विरोधी रुख में ढील को लेकर एलडीपी से अलग हुई थी, अब मुख्य विपक्षी दल संवैधानिक लोकतांत्रिक पार्टी के साथ मध्यमार्गी गठबंधन में है। यह गठबंधन यथार्थवादी सुरक्षा नीति, परमाणु-मुक्त दुनिया और विविधता जैसे मुद्दों पर जोर दे रहा है।
हालांकि, कोमेइतो के पारंपरिक मतदाता आधार के बावजूद, सर्वेक्षण इस गठबंधन के पक्ष में मजबूत रुझान नहीं दिखाते।
सुरक्षा और सैन्य ताकत पर फोकस
टोक्यो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर इज़ुरु माकिहारा के मुताबिक, वामपंथी दल लगातार कमजोर पड़ रहे हैं क्योंकि युवा मतदाता युद्ध-त्याग और परमाणु-विरोधी नीतियों को अव्यावहारिक मानते हैं। ताकाइची ने दिसंबर तक जापान की सुरक्षा और रक्षा नीतियों में बड़े बदलाव का वादा किया है। इनमें सैन्य क्षमताओं को मजबूत करना, घातक हथियारों के निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में ढील और युद्धोत्तर शांतिवादी सिद्धांतों से और दूरी बनाना शामिल है।
इसके साथ ही वह सख्त आव्रजन नीति, जासूसी-विरोधी कानून और विदेशियों पर नियंत्रण जैसे कदमों का समर्थन कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये नीतियां दक्षिणपंथी मतदाताओं को आकर्षित कर सकती हैं, लेकिन नागरिक अधिकारों पर असर डाल सकती हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से जापान पर रक्षा खर्च बढ़ाने के दबाव के बीच ताकाइची के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वह सुरक्षा खर्च बढ़ाने के लिए संसाधन कैसे जुटाती हैं। अपने चुनावी भाषणों में ताकाइची ने विवादास्पद मुद्दों से दूरी बनाते हुए अर्थव्यवस्था, सख्त आव्रजन नीति और विदेशी संपत्ति स्वामित्व पर नियंत्रण जैसे मुद्दों पर फोकस किया है।
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