जेएनयू छात्रसंघ चुनाव से पहले रविवार देर रात आयोजित प्रेसिडेंशियल डिबेट में गाजा, इज़रायल, दिल्ली दंगे और “बुलडोज़र राज” जैसे मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली।
चार नवंबर को होने वाले मतदान से पहले यह डिबेट छात्रों में खासा उत्साह पैदा कर गई। डिबेट की शुरुआत एनएसयूआई के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार विकास की स्पीच से हुई, जिन्होंने गाजा संकट के लिए इज़रायल को जिम्मेदार ठहराया और शरजील इमाम व उमर ख़ालिद जैसे आरोपितों के समर्थन में आवाज़ उठाई। उन्होंने लेफ्ट संगठनों पर कैंपस में अव्यवस्था फैलाने का आरोप भी लगाया।
वहीं एबीवीपी उम्मीदवार विकास पटेल ने कहा कि वह विवेकानंद के आदर्शों के अनुसार काम करेंगे। उन्होंने वामपंथी दलों पर देशभर में एबीवीपी कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न और जेएनयू में छात्रों की सुविधाओं में कटौती के लिए जिम्मेदार ठहराया।
लेफ्ट गठबंधन (SFI, AISA और DSF) की संयुक्त उम्मीदवार अदिति ने पलटवार करते हुए एबीवीपी पर कैंपस में गुंडागर्दी और असहमति की आवाज़ दबाने के आरोप लगाए। उन्होंने “बुलडोज़र राज” के जरिए गरीबों के घर उजाड़ने और केंद्र सरकार पर पुलिस का दुरुपयोग करने का भी आरोप लगाया।
सभी उम्मीदवारों ने विश्वविद्यालय में स्वास्थ्य सेवाओं, लाइब्रेरी और पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसी सुविधाओं को बेहतर बनाने का वादा किया।
जेएनयू छात्रसंघ चुनाव के लिए मतदान 4 नवंबर को होगा, जबकि नतीजे 6 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। पिछली बार तीन पदों पर लेफ्ट गठबंधन ने जीत हासिल की थी, जबकि संयुक्त सचिव पद एबीवीपी के खाते में गया था।
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