दलाई लामा के उत्तराधिकारी पर किरण रीजीजू का बयान, चीन ने जताई कड़ी आपत्ति – जानिए पूरा मामला

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दलाई लामा के उत्तराधिकारी पर किरेन रीजीजू की टिप्पणी से चीन भड़का, भारत से ‘सावधानी’ बरतने की नसीहत

केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू के उस बयान पर चीन ने कड़ी आपत्ति जताई है जिसमें उन्होंने कहा था कि अगला दलाई लामा कौन होगा, इसका निर्णय केवल वर्तमान दलाई लामा और संबद्ध धार्मिक संस्था ही करेंगी। चीन ने भारत से कहा है कि वह तिब्बत से जुड़े मामलों पर “सावधानी से” व्यवहार करे, जिससे द्विपक्षीय संबंधों पर असर न पड़े।

चीनी विदेश मंत्रालय की चेतावनी
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में रीजीजू के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत को दलाई लामा की “चीन विरोधी और अलगाववादी प्रकृति” को समझना चाहिए। उन्होंने भारत से अपील की कि वह चीन के आंतरिक मामलों में दखल देने से बचे और तिब्बत (जिसे चीन ‘शिजांग’ कहता है) को लेकर अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करे।

माओ ने दोहराया कि दलाई लामा और पंचेन लामा जैसे धार्मिक नेताओं के उत्तराधिकार का फैसला चीन की “घरेलू प्रक्रिया”, पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों और केंद्र सरकार की मंजूरी से ही होना चाहिए।

रीजीजू की टिप्पणी क्या थी?
अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने गुरुवार को कहा कि अगले दलाई लामा का चयन पूरी तरह से धार्मिक संस्था और स्वयं दलाई लामा का निर्णय होगा। उन्होंने साफ किया कि इसमें किसी अन्य देश या पक्ष की भूमिका नहीं होनी चाहिए। यह बयान उस समय आया है जब दलाई लामा ने हाल ही में कहा कि केवल ‘गादेन फोडरंग ट्रस्ट’ को ही उनके उत्तराधिकारी को मान्यता देने का अधिकार होगा।

भारत सरकार की स्थिति
विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि भारत सरकार आस्था और धार्मिक मान्यताओं से जुड़े मामलों में कोई रुख नहीं अपनाती। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हमने दलाई लामा संस्था की निरंतरता को लेकर दिए गए बयान पर रिपोर्ट देखी हैं। भारत धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान करता है और आगे भी करता रहेगा।”

धर्मशाला में समारोह, चीन की नजरें
रीजीजू और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह 6 जुलाई को धर्मशाला में दलाई लामा के 90वें जन्मदिन समारोह में शामिल होने जा रहे हैं। चीन पहले भी ऐसे आयोजनों पर आपत्ति जताता रहा है और इस बार भी तीखी प्रतिक्रिया दी है।

भारत-चीन संबंधों की पृष्ठभूमि
हाल के महीनों में भारत और चीन के बीच उच्च स्तरीय वार्ताएं फिर से शुरू हुई हैं, विशेषकर पूर्वी लद्दाख गतिरोध के चार वर्षों बाद। हालांकि, इस तरह के मुद्दे एक बार फिर से द्विपक्षीय संबंधों में तनाव ला सकते हैं।

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